धनबाद: अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (एआईपीडब्ल्यूए) के धनबाद जिला चौथे सम्मेलन में महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन में विशेष रूप से झारखंड राज्य महिला आयोग के गठन, महिला आरक्षण को जल्द लागू करने, तथा सहिया, रसोईया और सेविका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखी।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए एसोसिएशन की राज्य सचिव गीता मंडल ने कहा कि झारखंड में लंबे समय से राज्य महिला आयोग का गठन नहीं किया गया है। इसके कारण महिलाओं के उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर शोषण और अन्य सामाजिक अपराधों से जुड़े मामलों के त्वरित समाधान में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य महिला आयोग का गठन किया जाता है तो पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज हो सकेगी।
गीता मंडल ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि परिसीमन का हवाला देकर महिला आरक्षण को लागू करने में देरी की जा रही है, जबकि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी का अधिकार बिना किसी अनावश्यक विलंब के मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि परिसीमन की बाध्यता समाप्त कर महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए, ताकि महिलाओं की भागीदारी सभी स्तरों पर सुनिश्चित हो सके।
सम्मेलन में सहिया, रसोईया और सेविका जैसी योजनाओं से जुड़ी महिलाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और उन्हें उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि ये महिलाएं वर्षों से महत्वपूर्ण जनसेवा कर रही हैं, इसलिए उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
सम्मेलन के अंत में निर्णय लिया गया कि महिला आयोग के गठन, महिला आरक्षण लागू करने तथा कामकाजी महिलाओं की विभिन्न मांगों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही इन मुद्दों पर सरकार पर दबाव बनाने के लिए आगामी दिनों में चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। सम्मेलन में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी लिया गया।






