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ईरानी तेल लेकर आ रहा टैंकर ‘पिंग शून’ ने बदला रास्ता, भारत की जगह अब चीन की ओर बढ़ा
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भागलपुर
Sports
सहरसा में BDO बनीं ‘टीचर’, क्लास में पढ़ाया पाठ—बच्चों में दिखा उत्साह
सहरसा जिले के कहरा प्रखंड में उस वक्त एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब प्रखंड विकास पदाधिकारी अभिलाषा त्रिपाठी निरीक्षण के दौरान शिक्षक की भूमिका में नजर आईं। उनका यह अनोखा अंदाज अब इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
दरअसल, बीडीओ अभिलाषा त्रिपाठी इन दिनों प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रही हैं। इसी क्रम में वे विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण कर रही थीं। निरीक्षण के दौरान जब वे एक स्कूल पहुंचीं, तो उन्होंने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का जायजा लिया।
कक्षा में प्रवेश करते ही उन्होंने छात्र-छात्राओं से सवाल पूछे और उनके ज्ञान स्तर को परखा। इसके बाद वे खुद ब्लैकबोर्ड के सामने खड़ी हो गईं और बच्चों को पढ़ाने लगीं। बीडीओ को इस रूप में देखकर बच्चे काफी उत्साहित नजर आए और पूरे मन से पढ़ाई में जुट गए।
इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को सख्त हिदायत भी दी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने शिक्षकों को नियमित रूप से कक्षा संचालन और बच्चों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बीडीओ के इस अनोखे अंदाज ने न सिर्फ बच्चों को प्रेरित किया, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक संदेश भी दिया है।
Fitness
भोजपुर CHC में बड़ी लापरवाही: डॉक्टर मौजूद, फिर भी जेनरेटर ऑपरेटर ने किया घायल का इलाज
बिहार के भोजपुर जिले के कोईलवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज का इलाज प्रशिक्षित डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद जेनरेटर ऑपरेटर और आउटसोर्सिंग कर्मियों द्वारा किए जाने का मामला उजागर हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार, बीते गुरुवार की शाम कोईलवर-बबुरा फोरलेन पर जमालपुर के पास एक सड़क हादसे में दौलतपुर निवासी एक अधेड़ व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उसे तत्काल कोईलवर CHC लाया गया। लेकिन अस्पताल में जो हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया।
वायरल फोटो और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल का जेनरेटर ऑपरेटर और एक आउटसोर्सिंग सुपरवाइजर ग्लव्स पहनकर घायल मरीज का प्राथमिक उपचार कर रहे हैं, जबकि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और एएनएम पास में खड़े होकर तमाशा देखते नजर आ रहे हैं। इस घटना के सामने आते ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है।
लोगों का कहना है कि जब अस्पताल में प्रशिक्षित एएनएम, जीएनएम और डॉक्टर मौजूद थे, तो फिर गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों से इलाज क्यों करवाया गया। यह न सिर्फ चिकित्सा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीज की जान के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
इस मामले पर भोजपुर के प्रभारी सिविल सर्जन संजय सिन्हा ने कहा है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि कोईलवर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है और यह पता लगाया जा रहा है कि किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ।
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। अब देखने वाली बात होगी कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी लापरवाही पर रोक लग पाती है या नहीं।





