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सहरसा में थर्मामीटर खरीद में 1.33 करोड़ का बवाल, टाइपिंग मिस्टेक का दावा—पत्रकार पर धमकी देने का आरोप
सहरसा जिले के स्वास्थ्य विभाग में एक थर्मामीटर की खरीद के नाम पर 1 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि जीएम पोर्टल पर दर्ज होने के बाद उठे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर जहां एक ओर सवाल खड़े किए जा रहे थे, वहीं अब सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने सामने आकर पूरे प्रकरण पर विस्तृत सफाई दी है।
डॉ. प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी का नहीं, बल्कि एक तकनीकी त्रुटि यानी टाइपिंग मिस्टेक का परिणाम है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुल 16 अलग-अलग प्रकार के चिकित्सा उपकरणों और सामग्रियों की खरीद के लिए सूची तैयार की गई थी। लेकिन डेटा एंट्री के दौरान गलती से पूरी राशि केवल एक मद, यानी थर्मामीटर के सामने दर्ज हो गई, जिससे यह भ्रम पैदा हुआ कि इतनी बड़ी राशि केवल एक थर्मामीटर की खरीद के लिए निर्धारित की गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग ने इस त्रुटि को समय रहते पहचान लिया था और किसी भी प्रकार की खरीदारी नहीं की गई। साथ ही 31 मार्च के बाद पूरी राशि को वापस कर दिया गया, जिससे सरकारी धन का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ।
सिविल सर्जन ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को एक स्थानीय अखबार के पत्रकार द्वारा जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया। उनके अनुसार, संबंधित पत्रकार ने इस खरीद प्रक्रिया में टेंडर भरा था, लेकिन उसका टेंडर रद्द हो गया। इसके बाद से वह लगातार विभाग के खिलाफ भ्रामक और गलत खबरें प्रकाशित कर रहा है, जिससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है।
डॉ. प्रसाद ने यह भी कहा कि इस मामले में उन्हें कई बार धमकियां भी दी गई हैं। उन्होंने इस संबंध में थाने में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। सिविल सर्जन ने दोहराया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई है।
Fitness
सहरसा में थर्मामीटर खरीद में 1.33 करोड़ का बवाल, टाइपिंग मिस्टेक का दावा—पत्रकार पर धमकी देने का आरोप
सहरसा जिले के स्वास्थ्य विभाग में एक थर्मामीटर की खरीद के नाम पर 1 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि जीएम पोर्टल पर दर्ज होने के बाद उठे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर जहां एक ओर सवाल खड़े किए जा रहे थे, वहीं अब सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने सामने आकर पूरे प्रकरण पर विस्तृत सफाई दी है।
डॉ. प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी का नहीं, बल्कि एक तकनीकी त्रुटि यानी टाइपिंग मिस्टेक का परिणाम है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुल 16 अलग-अलग प्रकार के चिकित्सा उपकरणों और सामग्रियों की खरीद के लिए सूची तैयार की गई थी। लेकिन डेटा एंट्री के दौरान गलती से पूरी राशि केवल एक मद, यानी थर्मामीटर के सामने दर्ज हो गई, जिससे यह भ्रम पैदा हुआ कि इतनी बड़ी राशि केवल एक थर्मामीटर की खरीद के लिए निर्धारित की गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग ने इस त्रुटि को समय रहते पहचान लिया था और किसी भी प्रकार की खरीदारी नहीं की गई। साथ ही 31 मार्च के बाद पूरी राशि को वापस कर दिया गया, जिससे सरकारी धन का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ।
सिविल सर्जन ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को एक स्थानीय अखबार के पत्रकार द्वारा जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया। उनके अनुसार, संबंधित पत्रकार ने इस खरीद प्रक्रिया में टेंडर भरा था, लेकिन उसका टेंडर रद्द हो गया। इसके बाद से वह लगातार विभाग के खिलाफ भ्रामक और गलत खबरें प्रकाशित कर रहा है, जिससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है।
डॉ. प्रसाद ने यह भी कहा कि इस मामले में उन्हें कई बार धमकियां भी दी गई हैं। उन्होंने इस संबंध में थाने में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। सिविल सर्जन ने दोहराया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं हुई है।





