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भागलपुर
Sports
“भागलपुर सिविल सर्जन परिसर स्थित मजार का मुख्य गेट बंद: सुरक्षा कारणों का हवाला, जियारत पर कोई रोक नहीं – सिविल सर्जन का बड़ा बयान”
भागलपुर के **सिविल सर्जन कोठी परिसर** में स्थित हजरत मेंहदी शाह रहमतुल्लाह अलैह और हजरत अनजान शाह रहमतुल्लाह अलैह की मजार के **मुख्य द्वार पर ताला लगाए जाने** को लेकर पिछले कई दिनों से शहर में चर्चाओं का दौर तेज था। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय गलियों तक लोग यह सवाल उठा रहे थे कि आखिर मजार का गेट अचानक क्यों बंद किया गया? क्या मजार पर जियारत या इबादत में कोई रोक लगा दी गई है? इन सभी विवादों और आशंकाओं के बीच आज **सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद** ने पूरे मुद्दे पर स्पष्ट बयान देते हुए स्थिति को साफ किया।
डॉ. अशोक प्रसाद ने बताया कि मजार के मुख्य द्वार पर लगी ताला बंदी **सिर्फ सुरक्षा कारणों** से की गई है। उन्होंने कहा कि परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से वह गेट बंद किया गया है, जिसका इस्तेमाल सामान्य दिनों में कम होता था और जिसे प्रशासनिक रूप से **सिर्फ आपातकालीन निकास द्वार** के रूप में चिह्नित किया गया था। सुरक्षा समीक्षा के बाद इसे बंद करना आवश्यक समझा गया। उन्होंने लोगों को यह भी आश्वस्त किया कि इस निर्णय का **किसी भी तरह से धार्मिक गतिविधियों या आस्था** से कोई संबंध नहीं है।
सिविल सर्जन ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि मजार पर इबादत, दुआ या जियारत करने वालों को **आज तक कभी नहीं रोका गया** और न ही भविष्य में ऐसा करने की कोई योजना है। सभी लोग पहले की तरह शांति और सद्भाव के माहौल में मजार पर आ-जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि परिसर में प्रवेश करने और मजार तक जाने के लिए अन्य द्वार पूरी तरह खुले हैं और आमजन के लिए किसी प्रकार की बाधा नहीं है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मजार **सरकारी जमीन पर स्थित** है, और ऐसे में परिसर की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकारी भवनों और परिसरों में सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए कई बार कुछ प्रवेश मार्गों को नियंत्रित करना आवश्यक हो जाता है। इसी क्रम में यह निर्णय लिया गया है।
डॉ. प्रसाद ने कहा कि धार्मिक स्थलों का सम्मान करना प्रशासन की प्राथमिकता है और भागलपुर की गंगा-जमुनी तहज़ीब को बनाए रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। मजार से जुड़ी आस्था पुरानी और गहरी है, और प्रशासन इसका पूरा सम्मान करता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह या भ्रम में न पड़ें। मजार से संबंधित कोई भी समस्या या सुझाव हो तो उसे सीधे प्रशासन के साथ साझा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गलतफहमी के कारण अनावश्यक विवाद पैदा होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि मजार परिसर में **सुरक्षा बढ़ाने के अलावा कोई बदलाव नहीं** किया गया है।
समाप्ति में सिविल सर्जन ने आश्वासन दिया कि परिसर की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा दोनों को ध्यान में रखते हुए भविष्य में भी सभी निर्णय पारदर्शी तरीके से लिए जाएंगे, और किसी भी धार्मिक गतिविधि या आस्था को आहत होने नहीं दिया जाएगा।
Fitness
बैरिया धार में बहाव जारी, गंगा की मुख्य धारा शहर से दूर—कटाव रोकने की कवायद फिर थमी
भागलपुर। शहर के गंगा घाटों तक नदी की धारा को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश एक बार फिर थम गई है। बैरिया धार के मुहाने पर चल रहा ड्रेजिंग कार्य रविवार को भी पूरी तरह बंद रहा। इसके कारण गंगा की मुख्य धारा का पानी बैरिया धार होकर तेज रफ्तार में बहते हुए रत्तीपुर बैरिया घाट से होते हुए बूढ़ानाथ मंदिर घाट, मानिक सरकार घाट, विसर्जन घाट और बरारी घाट तक पहुंच रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस वर्ष बाढ़ के दौरान मुख्य धारा से सटे बैरिया धार के मुहाने पर लगभग 500 मीटर तक भारी कटाव हुआ है। इसी कटाव के कारण बैरिया धार में अब तक पानी का प्रवाह जारी है। पिछले वर्ष नवंबर की शुरुआत में ही गंगा का बहाव बैरिया धार से रुक गया था, लेकिन इस बार लगातार कटाव ने स्थिति बदल दी है।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के अनुसार, करीब चार साल पहले मुख्य धारा से शहर तक आने वाले चैनल का मुहाना गंगा नदी से लगभग तीन किलोमीटर दूर था। किंतु 2022 से 2025 के बीच इस क्षेत्र में तेजी से कटाव हुआ और लगभग तीन किलोमीटर भूमि नदी में समा गई। वर्तमान में रत्तीपुर बैरिया के सामने गंगा की धारा सीधी टकराव की स्थिति में है, जिससे कटाव और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैरिया धार के मुहाने पर गंगा की गहराई लगभग 10 मीटर है, जबकि धार के अंदर प्रवेश करने वाले हिस्से की गहराई मात्र दो मीटर ही बची है। जैसे ही गर्मियों में गंगा का जलस्तर घटेगा, बैरिया धार में पानी का प्रवाह धीरे-धीरे कम होते-होते पूरी तरह बंद हो जाएगा। इसके बावजूद धार के मुहाने के आसपास कटाव रुकने के आसार कम हैं।
स्थानीय भूगर्भीय संरचना भी चिंता बढ़ा रही है। धार के मुहाने में जहां गहराई घटकर दो मीटर रह गई है, उसके ठीक नीचे सफेद बालू की मोटी परत मौजूद है। यह बालू कटाव को और अधिक संवेदनशील बनाती है। यदि कटाव की प्रक्रिया यूं ही चलती रही, तो भविष्य में शहर के घाटों तक पानी का स्थायी प्रवाह बनाए रखना और कठिन हो जाएगा।
ड्रेजिंग कार्य के बार-बार रुकने से स्थानीय निवासियों में भी नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जब तक लगातार और वैज्ञानिक तरीके से काम नहीं होगा, तब तक गंगा की मुख्य धारा को शहर की ओर मोड़ने का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा।





