बिहार सरकार के 100 दिन पूरे होने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू किया गया ‘सहयोग शिविर’ और ‘सहयोग पोर्टल’ बेहद सफल साबित हुआ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार के पहले 15 दिनों में उन्होंने स्वयं 11 हजार से अधिक लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के सभी 534 प्रखंडों में सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। सहयोग पोर्टल पर अब तक 7 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से करीब 90 प्रतिशत मामलों का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि किसी आवेदन पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी को 11वें दिन नोटिस जारी किया जाता है। अब तक केवल 9 हजार मामलों में पहला नोटिस, 300 मामलों में दूसरा और सिर्फ 4 मामलों में तीसरा नोटिस जारी करना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि कोई भी मामला 30 दिनों से अधिक लंबित नहीं रहा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए कार्य संस्कृति बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि अब केवल 10 से 12 घंटे नहीं, बल्कि 15 घंटे तक काम करने की आवश्यकता है ताकि विकास की गति और तेज हो सके।
शिक्षा और विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 551 स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाया जा रहा है और कई जगहों पर नाइट क्लास भी शुरू की गई हैं। उन्होंने बताया कि कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय, शहीद जुब्बा साहनी के नाम पर आर्किटेक्चर एवं सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय तथा जननायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन पर शोध संस्थान स्थापित किए जाएंगे। साथ ही विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए 220 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है।
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने भी सहयोग शिविर कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह जनता की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बन चुका है और शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि हर जिले में आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है।







