पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रहित हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश और नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को संवेदनशीलता, संयम और जिम्मेदारी के साथ अपने विचार और आचरण का परिचय देना चाहिए। उनका कहना था कि भारत को हर परिस्थिति में सुरक्षित, सशक्त और एकजुट बनाए रखने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सकारात्मक भागीदारी आवश्यक है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की पहचान सहिष्णुता, संवेदना, त्याग और लोकतांत्रिक मूल्यों से है। सनातन संस्कृति के मूल में राष्ट्रहित, मानवता और सामाजिक समरसता की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद या समस्या का स्थायी समाधान केवल संवाद के माध्यम से ही संभव है। लोकतंत्र में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। असहमति लोकतंत्र की ताकत है, परंतु राष्ट्रहित और सामाजिक सद्भाव को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अश्विनी कुमार चौबे ने छात्र और युवा शक्ति को देश की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं, समस्याओं और भविष्य की अनदेखी किसी भी परिस्थिति में नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है, इसलिए उनके हितों की रक्षा करना और उनकी चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा दुनिया को शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया है। “तमसो मा ज्योतिर्गमय”, “अहिंसा परमो धर्मः” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे जीवन-मंत्र आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं मूल्यों के आधार पर भारत आगे बढ़ता रहा है और आगे भी बढ़ेगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सभी नागरिकों से राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता, मानवीय संवेदना और संवाद की परंपरा को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि सभी को मिलकर एक सुरक्षित, समृद्ध, सशक्त और एकजुट भारत के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।
संवाददाता: रजनीश कुमार, भागलपुर







