बिहार के शिवहर जिले के माली पोखर भिंडा पंचायत भवन की बदहाल तस्वीर सरकारी विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। जिस भवन में ग्राम सभा, जनसुनवाई और सरकारी योजनाओं का संचालन होना चाहिए था, वहां आज भेड़-बकरियां और भैंसें बंधी नजर आ रही हैं। पूरा परिसर झाड़-झंखाड़ और गंदगी से भरा पड़ा है।
पंचायत भवन के कमरों में गोबर और कीचड़ का अंबार लगा हुआ है। भवन में बिजली, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। परिसर में लगा चापाकल भी खराब हालत में है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन पर हमेशा ताला लटका रहता है और यहां कोई सरकारी कामकाज नहीं होता।
सबसे चिंताजनक स्थिति आंगनबाड़ी केंद्र और मनरेगा कार्यालय की है। जहां बच्चों की पढ़ाई और पोषण की व्यवस्था होनी चाहिए, वहां भूसा और गंदगी फैली हुई है। मनरेगा केंद्र भी वीरान पड़ा है। ग्रामीण सोनेलाल शाह ने बताया कि वर्षों से यहां किसी योजना का लाभ नहीं मिला और विकास सिर्फ कागजों तक सीमित है।
स्थानीय निवासी अनिल कुमार ने कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वोट मांगने आते हैं, लेकिन बाद में कोई दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार पंचायत भवन अब खंडहर में बदल चुका है और यहां सिर्फ पशुओं की आवाजें सुनाई देती हैं।
वहीं पंचायत मुखिया उमेश नारायण शाह ने सफाई के लिए फंड की कमी को जिम्मेदार बताया। उनका कहना है कि पर्याप्त राशि नहीं मिलने के कारण व्यवस्था सुधारना मुश्किल हो रहा है। हालांकि प्रखंड पदाधिकारी मो. राहिल ने मामले की जानकारी मिलने के बाद जल्द सुधार का आश्वासन दिया है।
माली पोखर भिंडा पंचायत भवन की यह तस्वीर ग्रामीण व्यवस्था की बदहाली और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में ठोस कार्रवाई करेगा और पंचायत भवन को फिर से जनसेवा के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।