बिहार में बाढ़ ने जहां जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, वहीं इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सहरसा जिले के बनमा ईटहरी प्रखंड की सहुरिया पंचायत स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, भेरहा इन दिनों चारों ओर से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि छात्र-छात्राओं के साथ-साथ शिक्षक और शिक्षिकाओं को भी विद्यालय पहुंचने के लिए करीब दो किलोमीटर तक कमरभर पानी में पैदल चलकर जाना पड़ रहा है।
पिछले दो दिनों में बाढ़ के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने के कारण विद्यालय तक पहुंचना और अधिक जोखिम भरा हो गया है। विद्यालय परिसर समेत आसपास का पूरा इलाका जलमग्न है। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इस उद्देश्य से शिक्षक जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुंच रहे हैं और नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं। वहीं, बच्चे भी शिक्षा के प्रति अपने जज्बे का परिचय देते हुए कठिन परिस्थितियों में स्कूल पहुंच रहे हैं।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका चंदा कुमारी ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए विद्यालय को किसी सुरक्षित स्थान पर अस्थायी रूप से स्थानांतरित करने अथवा विद्यालय संचालन कुछ समय के लिए स्थगित करने की मांग करते हुए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन भेजा गया है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण विद्यालय संचालन में गंभीर कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं और बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता का विषय है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ आने पर विद्यालय की यही स्थिति बन जाती है, लेकिन अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। उनका कहना है कि बाढ़ के बीच बच्चों और शिक्षकों का विद्यालय पहुंचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द विद्यालय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था भी सुचारु रूप से चलती रहे और किसी अप्रिय घटना की आशंका भी न रहे।
संवाददाता: इन्द्रदेव जी, सहरसा





