सहरसा में मखाना उत्पादन तकनीक पर अंतर्राज्यीय प्रशिक्षण, उत्तराखंड के किसानों को दी गई आधुनिक खेती की जानकारी

सहरसा। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, अगवानपुर में चल रहे तीन दिवसीय मखाना उत्पादन तकनीक विषयक अंतर्राज्यीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन बुधवार को विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, गढ़वाल और नैनीताल जिलों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

 

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दूसरे दिन सह निदेशक ने प्रतिभागियों से पहले दिन के प्रशिक्षण का फीडबैक लिया। प्रतिभागियों ने मखाना उत्पादन की आधुनिक तकनीकों से होने वाले लाभ और संभावित बदलावों के बारे में जानकारी साझा की। सह निदेशक ने बताया कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह और निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मखाना के अनुसंधान, क्षेत्र विस्तार और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।

 

तकनीकी सत्र में मृदा वैज्ञानिक डॉ. राजकिशोर कुमार ने मखाना की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और पानी की गुणवत्ता की जानकारी दी। सस्य वैज्ञानिक डॉ. राधेश्याम ने खरपतवार प्रबंधन पर चर्चा करते हुए बताया कि खेत पद्धति में खेत की तैयारी से पहले खरपतवारनाशी का प्रयोग किया जा सकता है, जबकि तालाब पद्धति में इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

 

कृषि मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल ने जलवायु अनुकूल मखाना खेती की जानकारी दी। पौध रोग वैज्ञानिक डॉ. ज्योति ने मखाना लावा के आयात-निर्यात से जुड़े पहलुओं पर जानकारी दी। वहीं डॉ. पंकज यादव ने पोषक तत्व प्रबंधन और मिट्टी जांच के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी। डॉ. मुहम्मद मेहताब राशिद ने मखाना के प्रमुख रोगों और उनके एकीकृत प्रबंधन की जानकारी दी, जबकि कृषि अर्थशास्त्री डॉ. एसएम रहमान ने मखाना लावा के उत्पादन के बाद बाजार और मार्केटिंग की जानकारी दी।

 

कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रतिभागियों को प्रायोगिक कार्य के लिए किसान के प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया। 10 सितंबर को प्रशिक्षण के तीसरे दिन भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया में तकनीकी सत्र और एक्सपोजर विजिट प्रस्तावित है। प्रशिक्षण में उत्तराखंड के अधिकारियों और बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की सक्रिय सहभागिता रही।

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