पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद इस सीट पर जल्द उपचुनाव होने की संभावना है। इसी बीच जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
बांकीपुर सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। पहले नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा और बाद में खुद नितिन नबीन लगातार यहां से चुनाव जीतते रहे हैं। 2025 विधानसभा चुनाव में नितिन नबीन ने आरजेडी उम्मीदवार रेखा कुमारी को 52 हजार वोटों से हराया था। वहीं जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी को केवल 4.92 प्रतिशत वोट मिले थे।
इसके बावजूद प्रशांत किशोर इस उपचुनाव को अपनी राजनीति की नई शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि अब बिहार में बीजेपी को सीधी चुनौती सिर्फ जन सुराज दे सकती है। पीके महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमत, गैस सिलेंडर और यूजीसी जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं।
हालांकि बीजेपी इस चुनौती को गंभीर नहीं मान रही। पार्टी प्रवक्ता पंकज सिंह का दावा है कि बांकीपुर की जनता बीजेपी के विकास कार्यों से संतुष्ट है और यहां फिर कमल ही खिलेगा। वरिष्ठ पत्रकार कौशलेंद्र प्रियदर्शी भी मानते हैं कि सामाजिक समीकरण और बीजेपी की मजबूत पकड़ के कारण इस सीट पर विपक्ष के लिए जीत आसान नहीं होगी।
बांकीपुर का जातीय समीकरण भी बीजेपी के पक्ष में माना जाता है। यहां कायस्थ मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं, जबकि यादव, भूमिहार, राजपूत, वैश्य और अन्य सवर्ण वोटर भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि बांकीपुर में बीजेपी की पकड़ बेहद मजबूत है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या प्रशांत किशोर वाकई मैदान में उतरते हैं और क्या यह उपचुनाव बिहार की राजनीति में कोई बड़ा संदेश देगा।