जामताड़ा जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और सरकारी जलाशयों के बेहतर उपयोग की दिशा में कृषि विभाग ने अहम कदम उठाया है। मंगलवार को जिला कृषि कार्यालय में सरकारी तालाबों की तीन वर्षीय बंदोबस्ती की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। इस प्रक्रिया के तहत दो प्रमुख तालाबों की सबसे ऊंची बोली लगाने वाले व्यक्तियों के नाम बंदोबस्ती तय की गई। विभाग का मानना है कि इससे जिले में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बंदोबस्ती प्रक्रिया के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी रितु रंजन सहित विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों की देखरेख में पूरी डाक प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संपन्न कराई गई।
डाक में सरखेलडीह तालाब की सबसे अधिक बोली 47,500 रुपये रही, जिस पर लालटू सरखेल के नाम इसकी बंदोबस्ती की गई। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र परिसर स्थित बेना तालाब की बंदोबस्ती पाकडीह निवासी मुख्तार अंसारी ने 46,000 रुपये की सर्वोच्च बोली लगाकर प्राप्त की। दोनों तालाब अगले तीन वर्षों तक संबंधित बंदोबस्तीधारियों के अधीन रहेंगे, जहां वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन किया जाएगा।
वहीं नाला तालाब की नीलामी नहीं हो सकी, क्योंकि डाक प्रक्रिया में कोई भी इच्छुक बोलीदाता शामिल नहीं हुआ। इसके चलते विभाग ने इसकी नीलामी फिलहाल स्थगित कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही नई तिथि घोषित कर दोबारा नीलामी की जाएगी।
कृषि विभाग का कहना है कि सरकारी तालाबों की समय पर बंदोबस्ती से जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, स्थानीय बाजार में ताजी मछलियों की उपलब्धता बेहतर होगी और लंबे समय से अनुपयोगी पड़े सरकारी जलाशयों का समुचित उपयोग सुनिश्चित होगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसी प्रक्रियाएं नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक किसान और युवा मत्स्य पालन से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें तथा अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
संवाददाता : संतोष कुमार








