बिहार के सीमांचल क्षेत्र में स्थित कटिहार और राजधानी पटना में पुलिस ने एक बेहद शातिर लैंड माफिया गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह का काम करने का तरीका इतना सुनियोजित और खतरनाक था कि उसने रजिस्ट्री कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य सबसे पहले अलग-अलग रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड रूम की रेकी करते थे। मौका मिलते ही ये लोग वहां रखे पुराने और असली दस्तावेजों को चोरी कर लेते थे। इसके बाद उन कागजातों में नाम और अन्य जरूरी विवरणों में बदलाव कर उन्हें फर्जी तरीके से असली जैसा बना दिया जाता था।

इसके बाद यही फर्जी दस्तावेज जमीन की दोबारा रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जमीन के असली मालिक को इसकी भनक तक नहीं लगती थी और उनकी संपत्ति किसी और के नाम ट्रांसफर हो जाती थी।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कटिहार पुलिस को एक विशेष इनपुट मिला। सूचना के अनुसार गिरोह के कुछ सदस्य पटना के निबंधन कार्यालय में बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम देने पहुंचे थे। इस जानकारी को साझा करते हुए पटना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और घेराबंदी कर चार आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर पुलिस ने कटिहार के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की, जहां मसीयूर रहमान उर्फ मुन्ना खान, सुरेश कुमार सिंह और प्रद्युम्न कुमार को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से भारी मात्रा में संदिग्ध रजिस्ट्री पेपर, सरकारी मुहरें और फर्जी कागजात बरामद हुए हैं।

फिलहाल पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि इस नेटवर्क में विभाग के कितने लोग शामिल थे। इस कार्रवाई के बाद भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

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