वैशाली: बिहार के वैशाली जिले में इन दिनों लाल भिंडी की खेती किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. गोरौल प्रखंड के गोरौल गांव की किसान इंदु देवी इस खेती से अच्छी कमाई कर रही हैं. उन्होंने बताया कि लाल भिंडी की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है और इससे हरी भिंडी की तुलना में ज्यादा मुनाफा मिल रहा है. अब आसपास के कई किसान भी इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
इंदु देवी ने बताया कि उन्हें पहली बार लाल भिंडी के बारे में जानकारी तब मिली, जब वह हाजीपुर स्थित अपने मायके गई थीं. वहां किसानों को इसकी खेती करते देखकर उन्होंने भी इसे अपनाने का फैसला किया. घर लौटने के बाद उन्होंने 5 कट्ठा खेत में लाल भिंडी की खेती शुरू की. उन्होंने बाजार से बीज लाकर बुआई की और अब इससे अच्छी आमदनी हो रही है.
उनका कहना है कि लाल भिंडी स्वाद में बेहतर होती है और इसका आकर्षक लाल रंग ग्राहकों को खूब पसंद आता है. यही वजह है कि ग्रामीण हाट और बाजारों में यह सामान्य भिंडी से अधिक कीमत पर बिकती है. उन्होंने बताया कि इसकी फसल करीब 45 दिनों में तैयार हो जाती है और साल में दो बार इसकी खेती की जा सकती है. गर्मी की फसल के लिए फरवरी-मार्च और बरसात की फसल के लिए जून-जुलाई सबसे उपयुक्त समय माना जाता है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लाल भिंडी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है. लाइन से लाइन की दूरी 2 से 2.5 फीट और पौधों के बीच 1 से 1.5 फीट की दूरी रखनी चाहिए. गर्मियों में हर चार से पांच दिन पर सिंचाई जरूरी है. साथ ही कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
डॉक्टरों का कहना है कि लाल भिंडी औषधीय गुणों से भरपूर होती है. यह डायबिटीज नियंत्रित करने, हृदय को मजबूत बनाने, पाचन तंत्र सुधारने और एनीमिया जैसी समस्याओं में भी फायदेमंद मानी जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक लाल भिंडी में सामान्य भिंडी की तुलना में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं.