केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी फिलहाल केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालय के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दी है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस दायित्व को पूरी निष्ठा, विनम्रता और कर्तव्य भावना के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले वर्षों में देश ने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के सफल क्रियान्वयन का श्रेय उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दिया।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से वह बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी इससे पीछे नहीं हटे।
गौरतलब है कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी था। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से आंदोलन चल रहा था। संगठन परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा था।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉजपा ने 36 दिनों से जारी अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। पार्टी के प्रवक्ता सौरव घोष ने दावा किया कि सरकार ने आंदोलनकारियों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है, जिनमें परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित रूप से आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा तथा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अब शिक्षा मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी के हाथों में है और सभी की नजरें शिक्षा व्यवस्था में आगे होने वाले सुधारों पर टिकी हैं।








