दरभंगा में नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और कोसी बैराज से छोड़े गए पानी का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी और घनश्यामपुर प्रखंड में कोसी, कमला और बलान नदियां उफान पर हैं। हालात ऐसे हैं कि 20 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, जबकि छह गांव पूरी तरह टापू में तब्दील हो गए हैं।
कुशेश्वरस्थान पूर्वी के इटहर, चौकिया, लक्ष्मिनियां, बलथरवा, बसबरिया और भरैन टोला समेत हजारों लोग बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। इन गांवों में लोगों की आवाजाही के लिए 13 नावें चलाई जा रही हैं। बाढ़ के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिससे बाजार, बैंक, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी नावों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उन्हें निजी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। नाविक एक बार आने-जाने के लिए प्रति व्यक्ति 40 रुपये किराया वसूल रहे हैं। इससे गरीब परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।
बाढ़ का पानी अब सरकारी स्कूलों तक भी पहुंच चुका है। प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मिनियां और प्राथमिक विद्यालय इटहर पोखर चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने कहा कि यदि जलस्तर और बढ़ता है तो बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा।
घनश्यामपुर प्रखंड में भी कमला-बलान नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। धान समेत अन्य खरीफ फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
जिला आपदा प्रबंध पदाधिकारी प्रणव राज ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। राहत और बचाव के लिए 186 सरकारी नावों की व्यवस्था की गई है। संभावित विस्थापितों के लिए 512 राहत शिविर और 611 सामुदायिक रसोई के स्थान चिन्हित किए गए हैं।
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि सभी तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। प्रभावित इलाकों के दो दर्जन गांवों को एहतियातन खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि शरणस्थलों, सामुदायिक रसोई और राहत व्यवस्था की सभी तैयारियां एसओपी के अनुसार पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन ने कुशेश्वरस्थान जैसे निचले इलाकों में जरूरत पड़ने पर निजी नाव संचालन की भी अनुमति दे दी है।








