सहरसा रेलवे स्टेशन से लगभग 18 किलोमीटर पश्चिम स्थित प्रसिद्ध मां उग्रतारा शक्तिपीठ श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर माता सती का बायां नेत्र गिरा था, जिसके कारण यह प्राचीन मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। तंत्र साधना के लिए भी यह स्थल विशेष महत्व रखता है।
मंदिर के पुजारी प्रमोद झा, दीपक झा, अजीत झा एवं डबलू कुमार झा ने बताया कि मां उग्रतारा अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ आने वाले भक्त कभी निराश नहीं लौटते। यही वजह है कि बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल और विदेशों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
हाल ही में मां की प्रतिमा के चारों ओर वर्षों से लगी ग्रिल को स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और जागरूक युवाओं के संयुक्त प्रयास से हटा दिया गया है। इससे अब श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के मां के सहज दर्शन हो रहे हैं।
इस कार्य को पूरा करने में सिमरी बख्तियारपुर के विधायक श्री संजय कुमार सिंह और सहरसा जिला प्रशासन ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं, इस विषय को निरंतर उठाने और धरातल पर समाधान सुनिश्चित कराने में जिला परिषद के भावी प्रत्याशी अंशु झा, मणिकांत सिंह, केशव वत्स, आयुष विराट ठाकुर, ध्रुव नीतीश, ब्रजकिशोर चौधरी, धनंजय झा, दीपक ठाकुर, सोमेश भारद्वाज और कन्हैया ठाकुर जैसे युवाओं का विशेष योगदान रहा।
मकर संक्रांति की देर रात यहां मां उग्रतारा को 56 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग अर्पित किया जाता है। इस अवसर पर सहरसा, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया सहित नेपाल से हजारों श्रद्धालु पहुंचकर महाप्रसाद ग्रहण करते हैं। यह शक्तिपीठ आज भी श्रद्धा, आस्था और विश्वास का जीवंत केंद्र बना हुआ है।
संवाददाता – इन्द्रदेव, सहरसा








