पटना: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और लालू परिवार के करीबी माने जाने वाले शिवचंद्र राम ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए वह भावुक हो गए और पत्रकारों के सामने रो पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
शिवचंद्र राम ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी और उसके नेतृत्व के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन बदले में उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उन्होंने जो मानसिक पीड़ा झेली है, वैसी स्थिति किसी के जीवन में नहीं आनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वह कई रातों से सो नहीं पाए हैं और खुद को बेहद आहत महसूस कर रहे हैं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि वह हमेशा पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता, मजदूर और सच्चे सिपाही की तरह काम करते रहे। जब भी पार्टी को उनकी जरूरत पड़ी, उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ जिम्मेदारियां निभाईं। इसके बावजूद उनके साथ न्याय नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केवल उनके साथ ही नहीं, बल्कि दलित समाज के साथ भी धोखा हुआ है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधान परिषद (एमएलसी) नहीं भेजे जाने से शिवचंद्र राम नाराज थे। माना जा रहा है कि उन्हें पार्टी की ओर से आश्वासन मिला था, लेकिन अंतिम समय में टिकट किसी और को दे दिया गया। उनकी जगह आरजेडी ने निवर्तमान एमएलसी सुनील सिंह पर दोबारा भरोसा जताया है। सुनील सिंह ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है। वह लालू परिवार के बेहद करीबी माने जाते हैं और राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई हैं।
55 वर्षीय शिवचंद्र राम दलित समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वह आरजेडी युवा मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्ष 2015 में वैशाली जिले की राजा पाकर सीट से विधायक चुने गए थे और महागठबंधन सरकार में कला, संस्कृति एवं युवा मामलों के मंत्री भी बने। हालांकि हाल के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उनके इस्तीफे ने आरजेडी के भीतर नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।