बेतिया : बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में एक बड़ा हादसा उस समय टल गया, जब धनौती नदी पर बना एक पुराना पुल अचानक ध्वस्त हो गया। पुल का करीब 10 फीट हिस्सा नदी में समा गया, जिससे बखरिया चौक एनएच-727 से लालसरैया होते हुए करमवा और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार, एक लोडेड ट्रैक्टर जैसे ही पुल से गुजर रहा था, पुल का हिस्सा अचानक धंस गया और ट्रैक्टर फंस गया। हालांकि जेसीबी की मदद से ट्रैक्टर को बाहर निकाल लिया गया और चालक की जान बाल-बाल बच गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पिछले कई महीनों से जर्जर स्थिति में था। पुल के बीच गहरा गड्ढा बन चुका था और रेलिंग भी टूट चुकी थी। इसके बावजूद प्रशासन ने मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल की खराब स्थिति को लेकर कई बार अधिकारियों को सूचना दी गई थी, लेकिन शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।
पुल ध्वस्त होने से बखरिया, करमवा, लालसरैया और राजभार समेत करीब दस गांवों तथा आधा दर्जन पंचायतों का संपर्क प्रभावित हो गया है। अब पश्चिमी चंपारण से पूर्वी चंपारण जाने वाले लोगों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी हो रही है।
इसका सबसे अधिक असर किसानों, छात्रों, मरीजों और सब्जी विक्रेताओं पर पड़ा है। कई लोग मजबूरी में पुल के किनारे से होकर नदी पार कर रहे हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने बताया कि धनौती नदी पर बने इस पुल का निर्माण लगभग 35 वर्ष पहले हुआ था। दो महीने पहले इसकी जर्जर स्थिति को लेकर जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी गई थी। घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश है और वे जल्द वैकल्पिक व्यवस्था तथा नए पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं।
लगातार पुलों के धंसने और गिरने की घटनाएं बिहार में पुलों के रखरखाव और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।