बिहार के गया जिले के मनमाधो गांव के रहने वाले विक्रम साव आज देशभर में सुर्खियों में हैं। कभी गरीबी और बेरोजगारी से जूझने वाला यह साधारण युवक अब एक खास वजह से चर्चा में है—जब देश के प्रधानमंत्री उनकी कोलकाता स्थित छोटी सी झालमुड़ी दुकान पर पहुंचे और वहां ग्राहक बनकर नाश्ता किया।
यह घटना पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच हुई, जब अचानक पीएम मोदी एक सामान्य दुकान पर पहुंच गए। विक्रम साव के लिए यह किसी सपने से कम नहीं था। बातचीत के दौरान जब विक्रम ने पूछा—“प्याज डालें?”—तो पीएम ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हां, प्याज खाते हैं, दिमाग नहीं खाते हैं।” यह हल्का-फुल्का संवाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और विक्रम रातों-रात चर्चा का विषय बन गए।
जैसे ही यह खबर गया के उनके गांव पहुंची, वहां खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने इसे पूरे गांव की उपलब्धि बताया। विक्रम का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर रहा है। गरीबी के कारण उनकी पढ़ाई नौवीं कक्षा के बाद छूट गई। करीब 10 साल पहले वे अपने पिता के साथ कोलकाता गए और पुश्तैनी झालमुड़ी के व्यवसाय को संभाल लिया।
बंगाल में झालमुड़ी की बड़ी मांग होने के कारण बिहार के कई लोग वहां इस काम से जुड़े हैं। कम पूंजी में शुरू होने वाला यह व्यवसाय मेहनत और व्यवहार के दम पर अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है, जिसका उदाहरण विक्रम हैं।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया ने भी उनकी पहचान को नई ऊंचाई दी। लोग उनकी सादगी और मेहनत की सराहना कर रहे हैं। खास बात यह रही कि जब पीएम ने पैसे देने चाहे तो विक्रम ने मना किया, लेकिन बाद में उन्होंने इसे आशीर्वाद मानकर स्वीकार किया।
हालांकि इस घटना पर ने सवाल उठाए, लेकिन स्थानीय लोगों ने इन आरोपों को निराधार बताया।
विक्रम साव की कहानी यह संदेश देती है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। मेहनत और सही मौके के साथ साधारण व्यक्ति भी असाधारण पहचान हासिल कर सकता है।
