पटना: भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं और करीब 13 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक स्थिति में हैं। अब यह बीमारी सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिहार के गांवों में भी तेजी से फैल रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार, बिहार के शहरी क्षेत्रों में 22% और ग्रामीण क्षेत्रों में 14.4% लोग मधुमेह से प्रभावित हैं। ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मामलों का कारण बदलती जीवनशैली और बढ़ती जांच जागरूकता मानी जा रही है।
पटना के न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा के अनुसार, बिहार की लगभग 38% आबादी प्री-डायबिटिक स्टेज में है, जो बेहद चिंताजनक है। उनका कहना है कि अब गांवों से भी मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं और युवा तथा बच्चों में भी यह बीमारी देखी जा रही है। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव और फास्ट फूड का बढ़ता चलन इसके प्रमुख कारण हैं।
डायबिटीज तब होती है जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यदि खाली पेट शुगर 126 mg/dL से ऊपर और खाने के बाद 200 mg/dL से अधिक हो जाए, तो इसे मधुमेह माना जाता है। यह बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती, लेकिन नियंत्रित की जा सकती है। प्री-डायबिटिक अवस्था में सही आहार और व्यायाम से इसे रोका जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, सही जीवनशैली ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। थाली में कार्बोहाइड्रेट कम और प्रोटीन, सलाद व हेल्दी फैट ज्यादा होना चाहिए। रोजाना 40 मिनट टहलना या सप्ताह में 150 मिनट व्यायाम जरूरी है। साथ ही, एक बार में ज्यादा खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करना चाहिए।
डायबिटीज कई गंभीर बीमारियों को जन्म देती है, जैसे हृदय रोग, किडनी की समस्या और आंखों की कमजोरी। इसलिए 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को साल में कम से कम दो बार ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। स्कूल स्तर से ही बच्चों को स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम के प्रति जागरूक करना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी इस गंभीर बीमारी से बच सके।
