भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के बाद आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नवगछिया और भागलपुर के बीच रोजाना आवाजाही करने वाले हजारों लोगों के सामने अब गंगा पार करने का संकट खड़ा हो गया है। सड़क संपर्क बाधित होने के कारण लोगों को मजबूरी में नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
सुबह होते ही गंगा के दोनों किनारों पर लोगों की लंबी कतारें लग जाती हैं। नौकरी, पढ़ाई, इलाज और जरूरी कामों के लिए लोगों को हर हाल में नदी पार करनी होती है। लेकिन इस आपदा की स्थिति में नाविकों द्वारा मनमाना किराया वसूला जा रहा है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार, बड़े नावों में बाइक पार कराने के लिए 200 रुपये तक लिए जा रहे हैं, जबकि प्रति व्यक्ति 100 रुपये वसूले जा रहे हैं। वहीं छोटे नावों में भी बाइक और व्यक्ति दोनों का किराया 100-100 रुपये तक पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर 50 रुपये में भी पार कराया जा रहा है, लेकिन कहीं भी कोई तय दर या सरकारी नियंत्रण नहीं दिख रहा है।
इस अव्यवस्था का असर छात्रों पर भी पड़ा है। पार्ट थर्ड की परीक्षा देने पहुंचे कई छात्र नाव से भागलपुर पहुंचे, लेकिन यहां पहुंचने के बाद उन्हें परीक्षा रद्द होने की जानकारी मिली। इससे उन्हें दोहरी परेशानी झेलनी पड़ी—पहले महंगे किराये में सफर और फिर बिना परीक्षा दिए वापस लौटना।
स्थिति को और गंभीर बनाता है प्रशासन का निष्क्रिय रवैया। अब तक न तो नाव संचालन के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और न ही किराया तय किया गया है। नावों में क्षमता से अधिक सवारी बैठाई जा रही है, जिससे हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? कब लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन की सुविधा मिलेगी? फिलहाल, आम जनता अपनी जान जोखिम में डालकर गंगा पार करने को मजबूर है।
