मोतिहारी में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनी नई सड़क और पुलिया महज 60 दिनों के भीतर ही धंस गई है। परसौनी से बोकाने होते हुए रामपुर मनोरथ तक बनी 1.8 किलोमीटर लंबी सड़क पर गहरी दरारें पड़ गई हैं, जबकि पुलिया पूरी तरह टूटकर बिखर गई है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क और पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि मजबूत सरिया और पर्याप्त सीमेंट की जगह निम्न गुणवत्ता की ईंट और बालू का उपयोग किया गया, जिसके कारण सड़क निर्माण के कुछ ही दिनों बाद धंस गई और पुलिया टूट गई। ग्रामीणों ने इसे सरकारी धन की खुली लूट बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
विवाद को और बढ़ाने वाली बात यह है कि निर्माण स्थल पर लगे सरकारी बोर्ड में योजना का नाम और सड़क की लंबाई तो दर्ज है, लेकिन प्राक्कलित राशि यानी परियोजना की लागत का कॉलम खाली छोड़ दिया गया है। इससे पारदर्शिता और वित्तीय अनियमितता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि सड़क विभाग ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि पुलिया पहले से मनरेगा योजना के तहत बनी हुई थी और विभाग ने केवल उसके ऊपर सड़क का निर्माण कराया था। अधिकारियों का दावा है कि ओवरलोड वाहनों के दबाव के कारण पुलिया क्षतिग्रस्त हुई होगी। विभाग ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
“पुलिया मनरेगा के तहत पहले से बनी थी। हमने सिर्फ ऊपर सड़क बनाई थी। ओवरलोड ट्रकों के कारण यह टूटी होगी। मामले की जांच कराई जाएगी।”
ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना सैकड़ों लोग और वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। पुलिया टूटने और सड़क धंसने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने जिलाधिकारी और ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता से शिकायत कर दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मानसून से पहले मरम्मत और जांच नहीं हुई तो यह मार्ग पूरी तरह बंद हो सकता है। फिलहाल यह मामला मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।