भागलपुर-दुमका मुख्य मार्ग पर लगातार लग रहे भीषण जाम से आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही के कारण स्कूली बच्चों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, महिलाओं, बुजुर्गों और व्यापारियों को प्रतिदिन घंटों सड़क पर फंसना पड़ रहा है। इससे न केवल लोगों का बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना हुआ है।
कैमरे पर नहीं आने की शर्त पर स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्ष 2019 में जगदीशपुर थाना क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना में युवक की मौत के बाद हुए उग्र प्रदर्शन के दौरान कई वाहनों में आग लगा दी गई थी। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने भागलपुर-दुमका मुख्य मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। इस व्यवस्था के तहत जगदीशपुर से भागलपुर की ओर आने वाले भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री लागू की गई थी, जबकि भागलपुर से हंसडीहा जाने वाले भारी वाहनों को लोदीपुर-गोराडीह मार्ग से वन-वे व्यवस्था के तहत परिचालित करने का निर्देश दिया गया था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान में इस व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया जा रहा है। जगदीशपुर और बाईपास थाना क्षेत्र में वन-वे नियमों की अनदेखी के कारण भारी वाहन सीधे मुख्य मार्ग पर प्रवेश कर रहे हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
लोगों ने जिला प्रशासन और यातायात पुलिस से मांग की है कि वन-वे व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए, नियमित जांच अभियान चलाया जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रभावी निगरानी के अभाव में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
इस संबंध में बाईपास थाना अध्यक्ष चनवीर यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका स्पष्ट पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। अब स्थानीय लोगों की निगाहें वरीय पुलिस अधीक्षक की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि वन-वे व्यवस्था को फिर से सख्ती से लागू कराया जाए तो जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
संवाददाता: रजनीश कुमार, भागलपुर







