बिहार के गया जिले के शेरघाटी अनुमंडल निवासी प्रवीण कुमार ने अपनी मेहनत, संघर्ष और लगन के दम पर सफलता की ऐसी मिसाल पेश की है जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। साधारण परिवार से आने वाले प्रवीण ने पहले आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और अब 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर एसडीएम बनने का गौरव प्राप्त किया है। उन्हें बिहार प्रशासनिक सेवा में 1306वीं रैंक मिली है।
प्रवीण के पिता वीरेंद्र चौधरी गांव में एक छोटी मेडिकल दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां सुशीला देवी आंगनबाड़ी सेविका हैं। आर्थिक तंगी के कारण शुरुआती दिनों में उन्हें किसी निजी विद्यालय में नहीं भेजा जा सका। पिता ने स्वयं घर पर पढ़ाकर कक्षा 1 से 5 तक की शिक्षा दिलाई। बाद में उन्होंने नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास कर आगे की पढ़ाई की।
दसवीं के बाद प्रवीण ने दक्षिणा फाउंडेशन की छात्रवृत्ति परीक्षा उत्तीर्ण की, जिसके बाद बेंगलुरु में इंटरमीडिएट और जेईई की तैयारी की। वर्ष 2016 में उन्होंने जेईई मेन में 99.9 प्रतिशताइल हासिल किया और आईआईटी खड़गपुर में प्रवेश पाया। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्हें पुणे की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी मिली।
कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम के दौरान उनके भीतर सिविल सेवा की तैयारी का जुनून पैदा हुआ। लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें दो बार बीपीएससी और एक बार यूपीएससी में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीसरे प्रयास में उन्होंने बीपीएससी परीक्षा पास कर एसडीएम बनने का सपना साकार कर लिया।
प्रवीण का कहना है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन मॉक टेस्ट के सहारे यह सफलता हासिल की है। भविष्य में वे यूपीएससी परीक्षा भी पास करना चाहते हैं। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में लाइब्रेरी स्थापित कर छात्रों को मोबाइल की लत से दूर रखने और बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने का संकल्प भी लिया है।
प्रवीण की सफलता से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है और स्थानीय लोग उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं।





