केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। 8वें वेतन आयोग ने अपनी प्रक्रिया को तेज कर दिया है और इसी क्रम में दिल्ली में तीन दिवसीय अहम बैठक आयोजित की गई है, जो 30 अप्रैल तक चलेगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्मचारी यूनियनों की मांगों पर विचार करना और नए वेतन ढांचे की रूपरेखा तैयार करना है।

सबसे ज्यादा चर्चा इस समय न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर हो रही है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वर्तमान ₹18,000 की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर सीधे ₹69,000 किया जाए। इसके पीछे तर्क यह दिया गया है कि अब वेतन निर्धारण का आधार बदलना चाहिए। पहले 3 सदस्यीय परिवार (पति-पत्नी और एक बच्चा) को आधार माना जाता था, लेकिन अब इसे 5 सदस्यीय यूनिट (जिसमें माता-पिता भी शामिल हों) करने की मांग की जा रही है।

वेतन वृद्धि का एक अहम पहलू ‘फिटमेंट फैक्टर’ भी है। कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच ने इसे 3.833 करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं करेगी, लेकिन अगर आंशिक रूप से भी मंजूरी मिलती है तो यह 2.86 तक जा सकता है। इससे कर्मचारियों की सैलरी में लगभग 25% से 30% तक की बढ़ोतरी संभव है।

वेतन आयोग सिर्फ बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं है, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसे भत्तों की भी समीक्षा की जा रही है। साथ ही वार्षिक वेतन वृद्धि को 3% से बढ़ाकर 5% या 6% करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

दिल्ली बैठक के बाद आयोग की टीम मई में महाराष्ट्र और पुणे का दौरा करेगी, जहां जमीनी स्तर पर कर्मचारियों से फीडबैक लिया जाएगा। जनवरी 2026 में गठित इस आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

संभावना है कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाएंगी। हालांकि रिपोर्ट में समय लग सकता है, लेकिन कर्मचारियों को एरियर मिलने की उम्मीद है। यदि प्रमुख मांगें मान ली जाती हैं, तो करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को बड़ा लाभ मिल सकता है।

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