झारखंड के जामताड़ा से सरकारी लापरवाही की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है, जहां सरकार की महत्वाकांक्षी पेयजल योजना पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है। गांव में लगाई गई सोलर पानी टंकी पिछले 7 सालों से बंद पड़ी है, और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि पूरा गांव सिर्फ एक चापाकल के सहारे अपनी प्यास बुझा रहा है। मामला जामताड़ा प्रखंड क्षेत्र के पाकडीह गांव का है।
वीओ:
पाकडीह गांव में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा वर्षों पहले सोलर आधारित पानी टंकी लगाई गई थी, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ और नियमित पेयजल मिल सके। शुरुआत में लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन यह उम्मीद ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी।
ग्रामीणों के अनुसार, पानी टंकी महज 6 महीने तक ही सही तरीके से काम कर सकी। इसके बाद मशीन खराब हो गई और फिर कभी चालू नहीं हो सकी। आज स्थिति यह है कि वह टंकी सिर्फ एक ढांचा बनकर रह गई है।
ग्रामीण रियाजउल अंसारी बताते हैं कि टंकी लगने के बाद कुछ महीनों तक पानी मिला, लेकिन फिर सब बंद हो गया। कई बार विभाग और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई मरम्मत नहीं हुई।
गर्मी बढ़ने के साथ ही परेशानी और गंभीर हो गई है। गांव के मुशर्रफ अंसारी कहते हैं कि पूरे गांव के लिए सिर्फ एक चापाकल है, जिससे पानी भरने के लिए लंबी लाइन लगती है। लोगों को पीने के पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
एक ओर सरकार हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का दावा करती है, वहीं जामताड़ा के पाकडीह गांव की यह तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां कर रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस बंद पड़ी योजना को कब तक चालू कर पाता है, या फिर ग्रामीण यूं ही पानी के लिए परेशान होते रहेंगे।
