भागलपुर। नाथनगर प्रखंड के रामपुर खुर्द और बिहारीपुर के बीच बाढ़ के पानी में मछली मारने के अधिकार को लेकर करीब 10 दिनों से चला आ रहा विवाद अब अंचल कार्यालय तक पहुंच गया है। दोनों पक्षों ने नाथनगर अंचल कार्यालय पहुंचकर अंचलाधिकारी मनोहर कुमार के सामने अपने-अपने दावे और पक्ष रखे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद देर शाम तक सुनवाई चलती रही, लेकिन तत्काल कोई फैसला नहीं हो सका।
बिहारीपुर पक्ष का दावा है कि संबंधित जलकर का इस्तेमाल वे करीब 50 वर्षों से करते आ रहे हैं। पक्ष की ओर से कहा गया कि जलकर से होने वाली आय का इस्तेमाल समाज कल्याण से जुड़े कार्यों में किया जाता है। वहीं, रामपुर खुर्द पक्ष ने जलभराव वाली जमीन को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताते हुए वहां मछली मारने के अधिकार और राजस्व में हिस्सेदारी पर अपना दावा जताया।
दोनों पक्षों के दावों के कारण विवाद और गहरा गया है। मामला अंचल कार्यालय पहुंचने के बाद प्रशासन ने दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर विवाद का समाधान करने की बात कही है।
अंचलाधिकारी मनोहर कुमार ने बताया कि लंबे समय से दूसरे पक्ष द्वारा जलक्षेत्र के दखल और उपयोग की बात सामने आई है। वहीं, जमीन के स्वामित्व को लेकर भी नया दावा किया गया है। ऐसे में संबंधित कागजात और मौके की स्थिति देखे बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है।
प्रशासन की ओर से गुरुवार को विवादित जलक्षेत्र का स्थल निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान टीम मौके पर पहुंचकर जमीन और जलभराव की स्थिति का जायजा लेगी। इसके साथ ही संबंधित राजस्व अभिलेखों की भी जांच की जाएगी।
अधिकारियों के मुताबिक, स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों पक्षों की नजर प्रशासन के स्थल निरीक्षण और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। बाढ़ के पानी के घटने-बढ़ने के बीच मछली मारने के अधिकार को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब जमीन के स्वामित्व और राजस्व हिस्सेदारी के दावे तक पहुंच गया है।






