भागलपुर जिले के नाथनगर विधानसभा क्षेत्र के सबौर और नाथनगर प्रखंड में बाढ़ प्रभावित लोगों को दी जा रही जीआर (ग्रैच्युटस रिलीफ) राशि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर मांग की गई है कि अब तक जिन बाढ़ पीड़ितों के खातों में जीआर की राशि भेजी गई है, उतनी ही राशि अन्य पात्र प्रभावित परिवारों के खातों में भी जल्द भेजी जाए, ताकि राहत से वंचित लोगों को भी आर्थिक सहायता मिल सके।
बाढ़ की स्थिति के बीच बुनकर परिवारों की परेशानी का मुद्दा भी सामने आया है। बताया गया कि कई बुनकर परिवारों के घर बाढ़ के पानी में डूब गए हैं और उनके पावरलूम भी प्रभावित हुए हैं। ऐसे परिवारों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। मांग की गई है कि बाढ़ से प्रभावित बुनकर परिवारों को भी जीआर राशि का लाभ दिया जाए। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा गया कि वर्ष 2015 तक ऐसे प्रभावित परिवारों को जीआर की राशि मिलती रही, लेकिन इसके बाद उन्हें यह सहायता नहीं मिल सकी।
भागलपुर जिले में करीब 14 प्रखंड बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। ऐसे में सभी प्रभावित परिवारों की पहचान कर उनके बैंक खातों में जीआर की राशि भेजने की मांग की गई है। राहत राशि मिलने से बाढ़ के कारण रोजमर्रा की जरूरतों और घरेलू सामान के नुकसान से जूझ रहे परिवारों को तत्काल आर्थिक मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता जताई गई है। पानी जमा होने के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका के बीच स्वास्थ्य टीमों की मौजूदगी बढ़ाने, दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने की मांग की गई है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई की व्यवस्था बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। जलजमाव वाले इलाकों में स्वच्छता, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राहत राशि के साथ प्रशासन को स्वास्थ्य, स्वच्छता और आवश्यक सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को इस संकट के दौरान राहत मिल सके।






