बोकारो। बोकारो स्टील प्लांट में चल रहे विस्तारीकरण कार्य को लेकर विस्थापित युवाओं की हिस्सेदारी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। भाकपा माले नेता राजू दुबे ने बीएसएल प्रबंधन पर विस्थापित परिवारों और स्थानीय युवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि विस्तारीकरण कार्य में विस्थापित युवाओं को उचित भागीदारी और रोजगार नहीं दिया गया तो भाकपा माले और एक्टू संयुक्त रूप से आंदोलन करेंगे।
बोकारो परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राजू दुबे ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट के विस्तारीकरण के लिए लंबे समय से तैयारियां चल रही हैं और अब कार्य को आगे बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में जिन लोगों ने अपनी जमीन और घर देकर बोकारो स्टील प्लांट की स्थापना में योगदान दिया, उनके परिवारों और युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की नीति के अनुसार किसी भी विस्तारीकरण परियोजना में काम कर रही कंपनियों में 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय और विस्थापित युवाओं को दिए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद बीएसएल विस्तारीकरण कार्य में विस्थापित युवाओं को उनकी अपेक्षा के अनुरूप अवसर नहीं मिल रहा है।
राजू दुबे ने कहा कि इस्पात सचिव की ओर से भी विस्तारीकरण के दौरान विस्थापितों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। लेकिन विस्तारीकरण की तैयारी का काम शुरू होने के बाद लगभग 3000 मजदूरों को रोजगार दिए जाने के बावजूद विस्थापित परिवारों के युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिन विस्थापित परिवारों की जमीन और संसाधनों पर बोकारो स्टील प्लांट का विकास हुआ, आज विस्तारीकरण के दौरान उन्हीं परिवारों के युवाओं को रोजगार से वंचित क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने प्रबंधन से इस मामले में तत्काल स्पष्ट नीति बनाने और स्थानीय विस्थापित युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग की।
भाकपा माले नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बीएसएल प्रबंधन और विस्तारीकरण कार्य में लगी कंपनियों का रवैया नहीं बदला, तो भाकपा माले और एक्टू संयुक्त रूप से आंदोलन शुरू करेंगे। आंदोलन के दौरान प्लांट में काम कर रही कंपनियों का विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि संगठन विस्थापित युवाओं के अधिकार और रोजगार के सवाल पर पीछे नहीं हटेगा। अब देखना होगा कि बीएसएल प्रबंधन इस मांग पर क्या कदम उठाता है या फिर बोकारो में विस्तारीकरण के साथ विस्थापितों के रोजगार का मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप लेता है।
बोकारो से चंदन सिंह की रिपोर्ट








