किशनगंज: बिहार के किशनगंज जिले के बहादुरगंज में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां एक युवती के जनाजे को कब्रिस्तान तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को उफनती खकवा नदी पार करनी पड़ी। सीने तक गहरे पानी और तेज बहाव के बीच लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर जनाजे को नदी के पार पहुंचाया।
दरअसल, सोमवार को वीरपुर गांव निवासी सईदुर्रहमान की 20 वर्षीय बेटी शहनसवी बेगम की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण उनके जनाजे को दफनाने के लिए बैसा कब्रिस्तान की ओर निकले। लेकिन कब्रिस्तान तक पहुंचने के रास्ते में खकवा नदी पड़ती है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण लोगों के सामने नदी पार करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
ग्रामीणों के मुताबिक, नदी पार करने से पहले लोगों ने अपने कपड़े उतारे और शव को लेकर तेज बहाव के बीच नदी पार की। दूसरी तरफ पहुंचने के बाद कपड़े पहनकर जनाजे को कब्रिस्तान तक ले जाया गया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
दर्जनों गांवों की यही मजबूरी: जिला परिषद प्रतिनिधि इमरान आलम के मुताबिक, बैसा कब्रिस्तान करीब 50 एकड़ में फैला है और नोदिया टोली, चकचकी, झींगाकाटा, दोगाछी, दर्जी टोला, लाटटोला, बैसा, तेघरिया और धापरटोली समेत दर्जनों गांवों के हजारों लोग इसी कब्रिस्तान का इस्तेमाल करते हैं।
बरसात के मौसम में खकवा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ खतरा और बढ़ जाता है। इसके बावजूद ग्रामीणों को अपने परिजनों के जनाजे को इसी रास्ते से ले जाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि नोदिया टोली-बैसा घाट पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। कई बार अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण भी किया, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और बिहार सरकार से जल्द पुल निर्माण की मांग की है। प्रशासन की ओर से मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों तक पहुंचाने और पुल निर्माण का प्रस्ताव भेजने की बात कही गई है।
ग्रामीणों का सवाल साफ है—जब एक अदद पुल के अभाव में अंतिम सफर भी जान जोखिम में डालकर तय करना पड़े, तो विकास के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।






