पटना में प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर सरकार और किसानों के बीच टकराव सामने आया है। ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम में जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर किसान प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। किसानों ने साफ कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि जमीन ही उनकी आजीविका और परिवार के भविष्य का मुख्य आधार है।
बैठक में शहरी विकास मंत्री नीतीश मिश्रा की ओर से करीब 800 किसानों के जमीन देने पर सहमति जताने की बात कही गई। इस पर किसान प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कई किसानों ने मजबूरी में सहमति दी है। किसानों ने मांग की कि सभी प्रभावित रैयतों की राय सार्वजनिक रूप से सामने लाई जाए और वास्तविक सहमति के आधार पर ही परियोजना आगे बढ़ाई जाए।
मुआवजा और पुनर्वास पर भी सवाल
किसानों ने जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे के साथ पुनर्वास, रोजगार और परिवार के भविष्य को लेकर भी सवाल उठाए। किसानों ने सुझाव दिया कि यदि परिवार को अचानक पैसे की जरूरत हो तो जमीन बेचने के बजाय सरकार जमीन के आधार पर ऋण उपलब्ध कराए, ताकि जमीन भी सुरक्षित रहे और आर्थिक जरूरत भी पूरी हो सके।
मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि विभाग योजना को अधिक सहभागी बनाने के लिए लगातार किसानों और भू-स्वामियों से संवाद करेगा। उन्होंने कहा कि शनिवार को पहला संवाद हुआ है और आगे प्रभावित लोगों को योजना की पूरी जानकारी देकर उनके सुझाव सुने जाएंगे। सरकार का कहना है कि व्यापक जनभागीदारी और निरंतर संवाद से ही समाधान निकलेगा।
81,730 एकड़ में विकसित होगी टाउनशिप
प्रस्तावित टाउनशिप करीब 81,730 एकड़ में फैलेगी। इसमें 9 प्रखंडों के 273 गांव शामिल हैं। पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी के क्षेत्र योजना के दायरे में हैं। वहीं पुनपुन के 19 गांवों में करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित है। सरकार इसे भविष्य की शहरी जरूरतों के लिए सुनियोजित विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि किसान अपनी उपजाऊ जमीन बचाने के लिए लामबंद हैं।






