
बेगूसराय जिले के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। सड़क दुर्घटना में घायल 20 वर्षीय युवक के फ्रैक्चर वाले पैर पर प्लास्टर या स्प्लिंट लगाने के बजाय डॉक्टरों ने कार्टन का टुकड़ा बांधकर उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह घटना 3 अगस्त की बताई जा रही है। सड़क हादसे में घायल युवक को इलाज के लिए मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया था। जांच के दौरान उसके पैर में फ्रैक्चर की आशंका जताई गई। आरोप है कि अस्पताल में आवश्यक प्लास्टर या स्प्लिंट उपलब्ध नहीं होने के कारण चिकित्सकों ने पैर को स्थिर रखने के लिए कार्टन का टुकड़ा बांध दिया और बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति का उदाहरण बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे मरीजों के साथ लापरवाही करार दिया।
वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज को रेफर करने से पहले प्राथमिक उपचार के तहत आपातकालीन स्थिति में पैर को हिलने से रोकने के लिए कार्टन का इस्तेमाल किया गया था। प्रशासन का दावा है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था थी, ताकि मरीज को सुरक्षित रूप से उच्च संस्थान तक पहुंचाया जा सके।
इधर, मामले के तूल पकड़ने के बाद बेगूसराय के सिविल सर्जन ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएग





