सहरसा सदर अस्पताल में बिजली गुल होने और मरीजों का इलाज टॉर्च की रोशनी में किए जाने की खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। अपना बिहार झारखंड की खबर और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मंगलवार को सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद स्वयं सदर अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, सोमवार रात करीब 8 बजे से 9 बजे के बीच अस्पताल की बिजली आपूर्ति अचानक बाधित हो गई थी। अस्पताल में जनरेटर की व्यवस्था होने के बावजूद बिजली बहाल नहीं हो सकी। इसका सबसे अधिक असर इमरजेंसी सेवा पर पड़ा, जहां मरीजों का इलाज मोबाइल और टॉर्च की रोशनी में करना पड़ा। ड्रेसिंग रूम और प्लास्टर रूम में भी अंधेरे के बीच स्वास्थ्यकर्मियों ने किसी तरह मरीजों का उपचार जारी रखा।
सौर बाजार निवासी देवकी देवी ने बताया कि वह अपने घायल परिजन बैजनाथ शर्मा का इलाज कराने सदर अस्पताल आई थीं। बिजली नहीं रहने और भीषण गर्मी के कारण उन्हें मरीज को हाथ से पंखा झलना पड़ा। उन्होंने कहा कि करीब एक घंटे तक बिजली नहीं रहने से मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंगलवार को निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन ने अस्पताल प्रबंधक और डिप्टी सुपरिटेंडेंट से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था में इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, अस्पताल की बिजली व्यवस्था देखने वाले मिस्त्री ने बताया कि जनरेटर में अचानक तकनीकी खराबी आ जाने के कारण उसे समय पर चालू नहीं किया जा सका। इसी वजह से बिजली कटने के बाद भी वैकल्पिक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई।
अब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अस्पताल की बिजली व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में मरीजों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।





