कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके 37 दिनों तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन करने के बाद अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर लौट आए हैं। घर पहुंचते ही परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। हालांकि उनके पिता भगवानराव दीपके ने आंदोलन के दौरान परिवार पर पड़े मानसिक दबाव और कथित धमकियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भगवानराव दीपके ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में दावा किया कि आंदोलन के दौरान उनके बेटे पर भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि परिवार ने यूट्यूब पर एक धमकी भरा वीडियो देखा, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि यदि अभिजीत भाजपा में शामिल नहीं हुए तो उनके माता-पिता को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने बताया कि पिछले 40 से 45 दिन पूरे परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण रहे। न ठीक से खाना खा पाए और न ही किसी से सामान्य रूप से बात कर सके। उनके अनुसार, अभिजीत देशहित के मुद्दे को लेकर अपनी नौकरी तक छोड़कर आंदोलन में जुटे रहे।
अभिजीत के पिता ने यह भी बताया कि उनके बेटे को सादा जीवन पसंद है, इसलिए घर वापसी पर स्वागत समारोह को जानबूझकर बेहद साधारण रखा गया। उन्होंने कहा कि अभिजीत हमेशा प्रचार-प्रसार से दूर रहना पसंद करते हैं और पहले भी गांव आने पर बड़े आयोजन से मना कर चुके हैं।
घर लौटने के बाद अभिजीत दीपके ने कहा कि 37 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद अपने परिवार के बीच लौटकर उन्हें बेहद सुकून महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब वह चैन की नींद सोना चाहते हैं और कुछ समय सामान्य जीवन बिताना चाहते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गई तो उनका संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करेगा। उनका कहना है कि जरूरत पड़ी तो अगला आंदोलन पहले से भी बड़ा होगा।
पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक पर भी अभिजीत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देने से व्यवस्था नहीं बदलती। जब तक व्यवस्था में ईमानदारी और जिम्मेदारी नहीं आएगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पेपर लीक मामलों के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली ही सुनवाई में सीबीआई के वकील के उपस्थित नहीं होने से सुनवाई टल गई, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।








