बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। उनकी अधिवक्ता निशा सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे कानून की प्रक्रिया के विपरीत और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया है। गांधी मैदान थाना कांड से जुड़े मामले में सोमवार को एसडीजेएम कोर्ट में तेज प्रताप यादव की जमानत याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई हुई।
अधिवक्ता निशा सिंह ने कहा कि तेज प्रताप यादव पहले से शुगर और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जेल में रखना उचित नहीं है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जाए ताकि उनकी सेहत की नियमित निगरानी हो सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पूरी कार्रवाई सुनियोजित तरीके से की। उनके अनुसार, शनिवार को जानबूझकर तेज प्रताप यादव को हिरासत में लिया गया ताकि अगले दिन रविवार होने के कारण उन्हें तत्काल अदालत से राहत नहीं मिल सके। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के समय तक संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। बिना एफआईआर के गिरफ्तारी कानून की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है और इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए।
निशा सिंह ने यह भी दावा किया कि गिरफ्तारी के बाद तेज प्रताप यादव को पहले दीघा थाना, फिर दानापुर और उसके बाद नौबतपुर थाना ले जाया गया। उन्होंने इसे भी अनावश्यक और सवालों के घेरे में बताया।
दंगा भड़काने सहित अन्य धाराओं को लेकर भी अधिवक्ता ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि तेज प्रताप यादव ने कोई भड़काऊ भाषण नहीं दिया और न ही किसी को उकसाने का प्रयास किया। वह केवल अपनी गाड़ी से वहां से गुजर रहे थे। छात्रों के आग्रह पर कुछ देर के लिए वाहन से उतरकर उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज लहराया और उसके बाद वहां से चले गए।
अब इस मामले में अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं, तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी और उस पर उठ रहे कानूनी सवालों ने बिहार की राजनीति में भी नई चर्चा छेड़ दी है।





