NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नया कानून लागू किया गया है, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। कानून के तहत दोषियों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना और 10 साल तक की जेल हो सकती है।
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में किसी भी परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित एवं भरोसेमंद बनाया जाए।
केंद्र सरकार ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, कड़ी निगरानी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के जरिए आने वाली परीक्षाओं को निष्पक्ष बनाने की तैयारी की जा रही है। सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा कि पेपर लीक की समस्या नई नहीं है और देश के कई राज्यों में पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विपक्ष पर निशाना साधते हुए सरकार ने कहा कि जिन दलों के शासन वाले राज्यों में भी पेपर लीक के मामले हुए, वहां समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
NEET विवाद के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सरकार ने कहा कि उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा है। सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बनाए रखना तथा सुधार की प्रक्रिया को और मजबूत करना है।
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अब केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया है। उन्हें परीक्षा सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में परीक्षा व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाया जाएगा।







