बिहार के शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक अपनी लंबित मांगों को लेकर लगातार जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर रहे हैं। इसी कड़ी में भागलपुर इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ ‘बुलो मंडल’ से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के समक्ष अनुदेशकों की समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा तथा शीघ्र समाधान की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने ऊर्जा मंत्री को बताया कि उनकी सबसे महत्वपूर्ण मांग विद्यालयों में पूर्णकालिक कार्य व्यवस्था लागू करने की है। अनुदेशकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। यदि उन्हें पूर्णकालिक सेवा का दर्जा दिया जाता है तो विद्यालयों में खेल, स्वास्थ्य शिक्षा और विद्यार्थियों के शारीरिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों को अधिक बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ ‘बुलो मंडल’ ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और उन्हें सकारात्मक आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस विषय को शिक्षा मंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा तथा सरकार स्तर पर अनुदेशकों की मांगों पर सकारात्मक पहल करने का प्रयास किया जाएगा। मंत्री के आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लेगी।
गौरतलब है कि बिहार में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की बहाली वर्ष 2022 में हुई थी। नियुक्ति के समय उनका मासिक मानदेय केवल 8,000 रुपये निर्धारित किया गया था, जिसे अनुदेशकों ने बेहद कम बताते हुए लगातार विरोध-प्रदर्शन किया। इसके बाद राज्यभर में धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपने, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात और सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हुई। अंततः चुनाव के दौरान सरकार ने उनका मानदेय बढ़ाकर 16,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया। अनुदेशकों का कहना है कि केवल मानदेय बढ़ना पर्याप्त नहीं है। उनकी मूल मांग पूर्णकालिक कार्य व्यवस्था लागू करने की है, ताकि उन्हें सम्मानजनक सेवा शर्तें मिल सकें और वे शिक्षा व्यवस्था में अपनी भूमिका को बेहतर तरीके से निभा सकें।







