गया जिले के टिकारी प्रखंड के भोरी गांव का 11 वर्षीय परमहंस इन दिनों अपनी असाधारण याददाश्त और प्रतिभा को लेकर चर्चा में है। चितरंजन कुमार के पुत्र परमहंस को लोग ‘जीनियस’ और ‘नन्हा विद्वान’ के नाम से पुकारते हैं। उसकी स्मरण शक्ति इतनी तेज है कि किसी भी विषय को एक बार पढ़ने के बाद वह उसे लंबे समय तक नहीं भूलता।
परमहंस इतिहास, विज्ञान, गणित, भूगोल और सामान्य ज्ञान जैसे विषयों में गहरी रुचि रखता है। वह इतिहास के अध्यायों पर बिना रुके लंबे समय तक बोल सकता है। रसायन विज्ञान के सभी 118 तत्वों के नाम और उनके संकेत मात्र दो मिनट में सुना देता है। उसके पिता का कहना है कि केमिस्ट्री और इतिहास जैसे विषय मानो उसकी जुबान पर रहते हैं और बचपन से ही उसमें चीजों को तुरंत याद कर लेने की अद्भुत क्षमता रही है।
परमहंस ने मैट्रिक स्तर के अधिकांश विषयों के साथ इंटरमीडिएट के कुछ पाठ्यक्रम भी पढ़ लिए हैं। उसे कविताएं लिखने और गाने का भी शौक है। इतिहास और समसामयिक विषयों पर लिखी अपनी कई कविताएं उसे कंठस्थ हैं। वह दुनिया के कई देशों की राजधानियां और 1885 से अब तक कांग्रेस अध्यक्षों के नाम भी तुरंत बता देता है।
छठी कक्षा के बाद उसने नियमित स्कूल जाना छोड़ दिया और अब घर पर अपने पिता के मार्गदर्शन में स्वाध्याय कर रहा है। उसके पिता भोरी संस्कृत हाई स्कूल के हेडमास्टर हैं और शुरू से उसकी प्रतिभा को निखारने में जुटे हैं।
परमहंस का बचपन संघर्षों से भी भरा रहा। कोरोना काल में छह वर्ष की उम्र में उसकी मां का निधन हो गया, जिसके बाद उसके पिता ने अकेले उसकी परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाली।
अब परमहंस अपनी प्रतिभा के आधार पर उम्र कम होने के बावजूद इसी वर्ष मैट्रिक परीक्षा में शामिल होना चाहता है। इसके लिए वह जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में विशेष अनुमति का आवेदन भी दे चुका है। उसका सपना IIT से पढ़ाई करने, IAS अधिकारी बनने और भविष्य में देश की राजनीति के शीर्ष स्तर पर पहुंचकर सेवा करने का है। उसकी विलक्षण प्रतिभा लोगों को हैरान कर रही है।








