बिहार के नालंदा जिले के चंडी प्रखंड स्थित उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय बढ़ौना में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। कक्षा 1 से 8 तक के छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए स्कूल पहुंचे तो कई कमरों में ताले लटके मिले। इसके बाद बच्चों को बरामदे और खुले परिसर में बैठाकर पढ़ाई कराई गई।
विद्यालय में कक्षा 1 से 12 तक कुल 809 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन पूरे स्कूल में केवल 13 कमरे हैं। इनमें से एक प्रधानाध्यापक कक्ष, एक पुस्तकालय और एक मध्याह्न भोजन कक्ष है। यानी पढ़ाई के लिए सिर्फ 11 कमरे उपलब्ध हैं। इसी वजह से जिला शिक्षा कार्यालय के निर्देश पर दो शिफ्ट में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। पहली पाली में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई सुबह 6:30 से 11 बजे तक, जबकि दूसरी पाली में कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं 11:30 बजे से शाम 5 बजे तक चलती हैं।
प्रधानाध्यापक अनुज कुमार का कहना है कि छोटे बच्चों को दोपहर की भीषण गर्मी से बचाने के लिए शिफ्ट परिवर्तन का प्रस्ताव वरीय अधिकारियों को भेजा गया है। वहीं शिक्षक श्रवण कुमार ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था के कारण बच्चों की उपस्थिति प्रभावित हो रही है और सोमवार को कमरे बंद रहने के कारण बरामदे में पढ़ाना पड़ा।
दो शिफ्ट की व्यवस्था से बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की मांग है कि कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई सुबह की पाली में कराई जाए, ताकि भीषण गर्मी से राहत मिल सके।
मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। स्थानीय विधायक हरिनारायण सिंह ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखकर प्राथमिक और मध्य विद्यालय की कक्षाओं को मॉर्निंग शिफ्ट में संचालित करने की मांग की है।
वहीं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुमित कुमार का कहना है कि विद्यालय में डीईओ कार्यालय के निर्देश के अनुसार ही शिफ्टवार पढ़ाई कराई जा रही है। फिलहाल संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए केवल योजनाएं नहीं, बल्कि पर्याप्त आधारभूत संसाधन भी जरूरी हैं।








