बिहार के गया जिले के बोधगया का 14 वर्षीय आदर्श राज अपनी शानदार फुटबॉल स्किल्स से लोगों का ध्यान खींच रहा है। महज 5 साल की उम्र से फुटबॉल खेलने वाले आदर्श ने बिना किसी बड़े कोच के सिर्फ यूट्यूब देखकर खेल सीखा और आज अपनी फुटबॉल जग्लिंग के दम पर पहचान बना रहे हैं।
आदर्श राज गेंद को पैरों, पेट, छाती और पीठ की मदद से लंबे समय तक हवा में नियंत्रित रखते हैं। उनकी फुटबॉल जग्लिंग देखने वाले हैरान रह जाते हैं। आदर्श का दावा है कि वह एक बार में 9 हजार से अधिक बार जग्लिंग कर चुके हैं, जबकि उनके पिता का कहना है कि अभ्यास के दौरान वह 12 हजार तक जग्लिंग कर लेते हैं।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो को अपना आदर्श मानने वाले आदर्श ने पिछले साल बिहार एकलव्य खेल के लिए चयन भी हासिल किया। वह अब तक अंडर-14 के कई राज्यस्तरीय मुकाबले खेल चुके हैं और 60 से अधिक गोल कर चुके हैं। मोतिहारी और भागलपुर जैसे टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है।
“बेहतर कोच नहीं मिला, इसलिए यूट्यूब देखकर फुटबॉल सीखी। मेरा सपना भारत के लिए खेलना और देश को फीफा वर्ल्ड कप में खेलते देखना है।”
आदर्श का कहना है कि बिहार में फुटबॉल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों को पर्याप्त मंच और सुविधाएं नहीं मिलतीं। उनका मानना है कि क्रिकेट की तुलना में फुटबॉल को कम महत्व दिया जाता है और सरकार को इस खेल के लिए बेहतर प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने चाहिए।
“5 साल की उम्र से ही आदर्श फुटबॉल खेल रहा है। हम उसे नियमित रूप से मैदान ले जाते रहे। उसकी मेहनत और लगन ने उसे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।”
आदर्श की मां सोनी श्रीवास्तव बताती हैं कि शुरुआत में वह बेटे को आईएएस बनाना चाहती थीं, लेकिन फुटबॉल के प्रति उसके जुनून को देखकर पूरा परिवार उसके साथ खड़ा हो गया।
कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर आदर्श राज अब राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना संजोए हुए हैं। उनका मानना है कि सही अवसर और बेहतर प्रशिक्षण मिले तो बिहार के खिलाड़ी भी विश्व फुटबॉल में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।








