पूर्वी चंपारण के पिपराकोठी में प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना को लेकर विवाद अब कानूनी और राजनीतिक रूप ले चुका है। निर्माण कार्य का विरोध करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में राजद सांसद सुधाकर सिंह समेत 57 लोगों के खिलाफ पिपराकोठी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें 27 नामजद और 30 अज्ञात आरोपी शामिल हैं।
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्माण कार्य रुकवाया, सरकारी कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। मामला कृषि विज्ञान केंद्र के पास स्थित करीब 14 एकड़ सरकारी गैरमजरूआ भूमि से जुड़ा है, जिसमें लगभग 3 एकड़ पर भारत सरकार की वाटर पार्क परियोजना प्रस्तावित है।
विवाद इसलिए गहराया क्योंकि इस जमीन पर वर्षों से खेती कर रहे किसान इसे अपनी आजीविका का आधार बताते हुए परियोजना का विरोध कर रहे हैं। 3 जुलाई को राजद सांसद सुधाकर सिंह किसानों के समर्थन में धरना स्थल पहुंचे और बाद में ट्रैक्टर पर सवार होकर विवादित जमीन की जुताई करते नजर आए। इस घटना के वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी।
अंचल प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि सरकारी गैरमजरूआ जरपेशकी श्रेणी की है। अधिकारियों के मुताबिक, किसानों को पहले खेती की अनुमति थी, लेकिन इससे स्वामित्व का अधिकार नहीं मिलता। प्रशासन का दावा है कि सभी पुरानी जमाबंदियां रद्द की जा चुकी हैं और वर्तमान में किसी के नाम पर वैध रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए परियोजना पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
वहीं सांसद सुधाकर सिंह और किसानों का आरोप है कि जमीन का वर्गीकरण बदलकर किसानों के अधिकार छीने जा रहे हैं। उनका कहना है कि बिना सहमति और उचित मुआवजे के जमीन अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसानों ने वैकल्पिक भूमि पर परियोजना बनाने की मांग भी उठाई है।
प्रशासन का दावा है कि वाटर पार्क से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। फिलहाल पिपराकोठी में विकास बनाम जमीन के अधिकार की यह लड़ाई तेज हो गई है। अब पूरे मामले में पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।






