
सहरसा जिले में मानसून की सुस्त रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की खेती प्रभावित हो रही है। खेतों में पानी की कमी के कारण किसान मोटर और डीजल पंप के सहारे सिंचाई कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। किसान अच्छी बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
नरियार गांव के किसान सुनील भगत और अनिल भगत का कहना है कि खाद की बढ़ती कीमतों और पानी की कमी ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। ऊंचे इलाकों में धान का बिचड़ा तैयार करना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों का आरोप है कि सरकार की डीजल अनुदान योजना का लाभ समय पर नहीं मिल रहा। पिछले महीने फसल क्षति के बाद आवेदन करने के बावजूद अब तक मुआवजा नहीं मिला है।
किसानों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। उनका आरोप है कि कई योजनाओं का फायदा बिचौलियों तक सीमित रह जाता है। किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से समय पर डीजल अनुदान, उचित दर पर खाद और फसल क्षति का मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।
उधर, मौसम वैज्ञानिक रामानन्द पटेल ने राहत भरी खबर दी है। उनके अनुसार आने वाले दिनों में आंधी, वज्रपात और अच्छी बारिश की प्रबल संभावना है। अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। साथ ही 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
मौसम विभाग ने जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है, उन्हें बारिश मिलते ही रोपाई के लिए खेत तैयार रखने की सलाह दी है। वहीं पशुपालकों से अपील की गई है कि आंधी और वज्रपात के दौरान मवेशियों को खुले स्थान पर न बांधें और सुरक्षित जगह पर रखें।
फिलहाल किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। उनका मानना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो धान की खेती पर बड़ा असर पड़ेगा और उत्पादन में गिरावट आने की आशंका बढ़ जाएगी।





