बिहार के चुनावी मॉडल का बढ़ा देशभर में मान, छत्तीसगढ़ की टीम ने पटना पहुंचकर किया तकनीकी नवाचारों का अध्ययन
पटना : पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के कारण बिहार का चुनावी मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है. इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग का दो सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल बिहार पहुंचा और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा विकसित तकनीकी नवाचारों तथा चुनाव प्रबंधन प्रणाली का विस्तृत अध्ययन किया.
राज्य निर्वाचन आयोग मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान बिहार में चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए अपनाई गई आधुनिक तकनीकों की जानकारी साझा की गई. प्रतिनिधिमंडल को नामांकन, मतदान और मतगणना तक की पूरी चुनावी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया गया. साथ ही पंचायत और नगर निकाय चुनावों में लागू प्रशासनिक और तकनीकी उपायों की भी जानकारी दी गई.
अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बिहार की डिजिटल चुनावी प्रणालियां रहीं. प्रतिनिधिमंडल को ई-वोटिंग प्रणाली का लाइव प्रदर्शन दिखाया गया. अधिकारियों ने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाना है. इसके अलावा फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) की कार्यप्रणाली भी समझाई गई, जिसके माध्यम से मतदाताओं की पहचान सत्यापित कर चुनावी प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की संभावना को कम किया जा सकता है.
छत्तीसगढ़ की टीम ने ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) तकनीक का भी अध्ययन किया. अधिकारियों के अनुसार, ओसीआर के जरिए चुनावी दस्तावेजों और अभिलेखों का डिजिटल प्रसंस्करण तेज और अधिक सटीक बनाया जा सकता है. इसके साथ ही डिजिटल लॉक प्रणाली का प्रदर्शन भी किया गया, जो चुनाव संबंधी संवेदनशील सूचनाओं और डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
बैठक में बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने चुनाव सुधार, ईवीएम के प्रभावी उपयोग, सुरक्षा प्रबंधन, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था पर प्रस्तुति दी. पीएमसी और एसईआर टीमों ने भी तकनीकी पहलुओं की जानकारी साझा की.
छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के चुनावी मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि ई-वोटिंग, फेशियल रिकग्निशन, ओसीआर और डिजिटल सुरक्षा जैसी तकनीकें भविष्य की चुनावी व्यवस्थाओं को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने में सहायक साबित होंगी. बैठक के अंत में दोनों राज्यों ने तकनीकी अनुभवों और प्रशासनिक नवाचारों के आदान-प्रदान को लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.