बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, एनडीए की रणनीति रही सफल

पटना: बिहार विधान परिषद की 10 रिक्त सीटों पर चुनाव की औपचारिकता पूरी होने से पहले ही सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचित होना तय हो गया है। नामांकन वापसी का आज अंतिम दिन है और किसी भी सीट पर विपक्ष की ओर से उम्मीदवार नहीं उतारे जाने के कारण मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ऐसे में सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की जाएगी।

इन सीटों पर एनडीए के घटक दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। भाजपा ने भोजपुरी गायक एवं अभिनेता पवन सिंह, संजय मयूख, शीला पंडित और अनिल ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। वहीं जदयू ने भारती मेहता, निशांत कुमार, लल्लन प्रसाद, शिवानी देवी और सुनील कुमार सिंह को मैदान में उतारा। लोजपा (रामविलास) की ओर से अशरफ अंसारी को प्रत्याशी बनाया गया है।

इनमें सबसे चर्चित सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई सीट है। इस सीट पर जदयू ने लल्लन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक रहेगा, जबकि अन्य नौ सदस्यों का कार्यकाल वर्ष 2032 तक होगा। कई सीटें सम्राट चौधरी और भगवान सिंह कुशवाहा जैसे नेताओं के विधायक चुने जाने के कारण रिक्त हुई थीं।

28 जून को जिन नौ विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें डॉ. कुमुद वर्मा, प्रो. गुलाम गौस, मोहम्मद फारूक, भीष्म सहनी, भगवान सिंह कुशवाहा, संजय प्रकाश, समीर कुमार सिंह, सम्राट चौधरी और सुनील कुमार सिंह शामिल हैं।

इस चुनाव में कुछ पुराने चेहरों को भी दोबारा मौका मिला है। भाजपा ने संजय मयूख पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें तीसरी बार विधान परिषद भेजने का निर्णय लिया है। वहीं सुनील कुमार सिंह को भी पुनः मौका मिला है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, एनडीए ने सीटों की संख्या के अनुसार ही उम्मीदवार उतारकर अपनी रणनीतिक मजबूती का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठबंधन ने यह सुनिश्चित किया कि जितनी सीटें खाली हैं, उतने ही उम्मीदवार मैदान में हों। इसी रणनीति के चलते विधान परिषद की सभी 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।

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