गया: बिहार के राजगीर में चल रहे प्रसिद्ध मलमास मेले की आस्था अब गया के प्राचीन ब्रह्मसरोवर में भी देखने को मिल रही है। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि इस पवित्र माह में विधि-विधान से स्नान और पूजा करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
17 मई से शुरू हुआ मलमास पर्व 15 जून तक चलेगा। इस दौरान गया के ब्रह्मसरोवर में प्रतिदिन महिलाओं और पुरुषों की भारी भीड़ देखी जा रही है। श्रद्धालु सरोवर में स्नान करने के बाद कथा श्रवण और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
ब्रह्मसरोवर के पुजारी राजेश बिहारी द्विवेदी के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में देश के चार प्रमुख धार्मिक स्थलों पर स्नान और पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इनमें राजस्थान का पुष्कर, राजगीर, गया का ब्रह्मसरोवर और प्रेतशिला शामिल हैं। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भी ब्रह्मसरोवर में पूजा-अर्चना कर ब्राह्मणों को दान दिया था। इसी परंपरा के तहत श्रद्धालु यहां स्नान कर कथा सुनते हैं और अपनी श्रद्धा अनुसार दान-पुण्य करते हैं।
ब्रह्मसरोवर के तट पर स्थित प्राचीन ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि इस सरोवर की स्थापना स्वयं ब्रह्मा जी ने की थी और इसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है।
श्रद्धालु पल्लवी ने बताया कि जो लोग राजगीर नहीं जा पाते, वे गया के ब्रह्मसरोवर में स्नान और पूजा कर समान धार्मिक फल प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, ज्योति त्रिपाठी ने कहा कि मलमास के दौरान सरोवर के मध्य ध्वजा स्थापित की जाती है और यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
आस्था, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं के संगम बने ब्रह्मसरोवर में इन दिनों भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां स्नान और पूजा करने से मन की शुद्धि होती है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।