पलामू जिले के रेहला थाना क्षेत्र में कोयल नदी से अवैध बालू खनन का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक रोक के बावजूद नदी घाटों से बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है। रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू की ढुलाई खुलेआम की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि देर रात बालू लदे ट्रैक्टर मुख्य सड़कों से होकर गुजरते हैं। इसके बावजूद इन वाहनों को न तो रोका जाता है और न ही कोई सख्त जांच की जाती है। क्षेत्र में चर्चा है कि सरकारी दर पर मिलने वाला बालू अवैध तरीके से निकालकर ब्लैक मार्केट में 3 हजार से 4 हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर तक बेचा जा रहा है। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।
झारखंड सरकार द्वारा बालू उठाव पर रोक लगाए जाने के बावजूद अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद दिखाई दे रहे हैं। कोयल नदी के विभिन्न घाटों से लगातार हो रही बालू निकासी न केवल सरकारी नियमों की अवहेलना है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित बालू खनन से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, भू-क्षरण बढ़ता है और भविष्य में जल संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि तेज रफ्तार से दौड़ते बालू लदे ट्रैक्टर आम लोगों के लिए खतरा बन चुके हैं। कई बार दुर्घटना की आशंका उत्पन्न हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
क्षेत्र में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब सरकार ने बालू खनन पर रोक लगा रखी है, तो आखिर यह कारोबार किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन की उदासीनता या संभावित मिलीभगत के कारण ही अवैध बालू खनन का धंधा निर्बाध रूप से जारी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संवाददाता : सत्यम शुक्ला