धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित मैथन डैम इन दिनों घटते जलस्तर के कारण चर्चा में है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध यह डैम अब सूखे हिस्सों और उभरी चट्टानों की तस्वीर पेश कर रहा है। जलस्तर में लगातार गिरावट से न केवल पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ है, बल्कि भविष्य में पेयजल आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ने लगी हैं।
जानकारी के अनुसार, मानसून से पहले डैम में मरम्मत और रखरखाव कार्य के तहत डीवीसी (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) द्वारा जलस्तर कम किया जा रहा है। साथ ही हाइडल पावर प्लांट से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर घटकर लगभग 461 फीट तक पहुंच गया है। भीषण गर्मी को भी इसके पीछे एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
जलस्तर कम होने का सबसे अधिक असर पर्यटन गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है। जो मैथन डैम कभी पर्यटकों की भीड़ से गुलजार रहता था, वहां अब अपेक्षाकृत सन्नाटा नजर आ रहा है। घूमने आए पर्यटकों का कहना है कि पानी कम होने से डैम की खूबसूरती प्रभावित हुई है, जिससे आकर्षण भी घटा है।
नाविकों के अनुसार, नौकायन गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पहले जहां दिनभर कई बार नावें चलती थीं, वहीं अब सीमित संख्या में ही पर्यटक पहुंच रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ा है।
पर्यटकों की संख्या घटने से डैम किनारे के छोटे कारोबारियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। चाय-नाश्ता, खिलौने और अन्य सामान बेचने वाले दुकानदारों की बिक्री में भारी कमी आई है। वहीं झूला और मनोरंजन से जुड़े व्यवसाय भी प्रभावित हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कारोबार में गिरावट के कारण परिवार का खर्च चलाना चुनौती बनता जा रहा है।
उधर, यदि जलस्तर में और कमी आती है तो मैथन-धनबाद जलापूर्ति योजना पर असर पड़ सकता है। इससे चिरकुंडा, निरसा, कुमारधुबी, गोविंदपुर सहित धनबाद के कई क्षेत्रों में पेयजल संकट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि डीवीसी प्रबंधन ने फिलहाल ऐसी किसी गंभीर स्थिति से इनकार करते हुए कहा है कि डैम की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
फिलहाल लोगों की उम्मीदें आगामी मानसून पर टिकी हैं, जिससे जलस्तर बढ़ने और पर्यटन गतिविधियों के दोबारा रफ्तार पकड़ने की संभावना है।