नालंदा में संस्कृत शिक्षा पर संकट, शिक्षक नहीं तो स्कूल भी बंद होने की कगार पर

ज्ञान की धरती नालंदा में संस्कृत शिक्षा का अस्तित्व गंभीर संकट से गुजर रहा है। बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत जिले के 31 संस्कृत विद्यालयों में से 6 स्कूल पूरी तरह बंद हो चुके हैं, जबकि कई अन्य विद्यालय शिक्षक और संसाधनों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। वर्षों से नई बहाली नहीं होने के कारण एक-एक कर शिक्षक सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं और विद्यालय वीरान होते जा रहे हैं।

थरथरी प्रखंड के अमेरा स्थित संस्कृत विद्यालय की स्थिति सबसे चिंताजनक है। वर्ष 1977 में स्थापित इस विद्यालय में लगभग 70 छात्र नामांकित हैं, लेकिन दिसंबर 2025 में एकमात्र शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद यहां पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। स्कूल में केवल दो रसोइयां आती हैं, सफाई करती हैं और उपस्थिति दर्ज कर लौट जाती हैं। आठवीं पास कर चुके छात्र ट्रांसफर सर्टिफिकेट के लिए भटक रहे हैं, क्योंकि हस्ताक्षर करने वाला कोई शिक्षक मौजूद नहीं है।

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संस्कृत विद्यालय संघ के अध्यक्ष अमरजीत कुमार के अनुसार, 2015 के बाद से न तो नई नियुक्तियां हुईं और न ही रोस्टर प्रकाशित किया गया। नूरसराय, जैतीपुर और अमेरा समेत छह विद्यालय बंद हो चुके हैं, जबकि कई स्कूलों में केवल एक या दो शिक्षक ही बचे हैं।

अमेरा विद्यालय के प्रधानाध्यापक विद्या सागर ने बताया कि उनका नियोजन वर्ष 2013 में हुआ था, लेकिन आज तक नियमित वेतन नहीं मिला। वेतन और एरियर के लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी। वर्ष 2023 में फैसला उनके पक्ष में आया, फिर भी भुगतान नहीं हुआ। उनका कहना है कि परिवार चलाने और बेटियों की शादी के लिए जमीन बेचने की नौबत आ गई है।

विद्यालयों में छात्रवृत्ति, पोशाक सहायता और मिड-डे मील जैसी योजनाएं भी प्रभावी नहीं हैं, जिससे छात्रों का भरोसा लगातार टूट रहा है। वहीं मदरसों में भी कई महीनों से वेतन भुगतान लंबित है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी विजय आनंद का कहना है कि मामले की सुनवाई चल रही है और आदेश मिलते ही वेतन जारी किया जाएगा। साथ ही बंद विद्यालयों को दोबारा संचालित करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि सवाल यह है कि ये प्रयास धरातल पर कब दिखेंगे। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नालंदा की संस्कृत शिक्षा इतिहास बन सकती है।

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