नालंदा जिले में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पटना हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच में निगरानी विभाग की टीम ने हिलसा, राजगीर और सिलाव प्रखंड के पांच शिक्षकों के खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इन शिक्षकों पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है।
सबसे पहले हिलसा प्रखंड के पचरुखिया उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका शारदा रानी के खिलाफ कार्रवाई की गई। वर्ष 2013 में नियुक्त शारदा रानी ने उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से बीएड की डिग्री प्रस्तुत की थी। निगरानी विभाग द्वारा विश्वविद्यालय से प्रमाणपत्र की जांच कराए जाने पर यह दस्तावेज फर्जी पाया गया। इसके बाद हिलसा थाना में कांड संख्या 447/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।
इसके अलावा राजगीर प्रखंड के अंडवस मध्य विद्यालय के शिक्षक मो. जाहिद परवेज, सिलाव प्रखंड के धामर उत्क्रमित मध्य विद्यालय के सुबोध कुमार, पचवारा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के नीरज कुमार तथा नानंद मध्य विद्यालय के मणि शंकर शर्मा के खिलाफ भी अलग-अलग मामलों में केस दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत प्रमाणपत्र संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं।
जिले में अब तक फर्जी प्रमाणपत्र मामले में 80 शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने सभी नियोजित शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।
राजगीर अनुमंडल के डीएसपी संजित कुमार गुप्ता ने बताया कि सभी मामलों की गहन जांच की जा रही है। पुलिस फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले गिरोह और बिचौलियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। साथ ही संबंधित विभाग को सूचना भेजकर आरोपित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह मामला बिहार की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ और भी नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।