गया: बिहार के गया जिले के बथानी थाना क्षेत्र स्थित बणडी गांव से इंसानियत और भाईचारे की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुआ ‘खिदमत ग्रुप’ आज जरूरतमंदों के लिए फरिश्तों की टोली बन चुका है। महज 10 युवाओं से शुरू हुआ यह समूह अब करीब 100 सदस्यों का परिवार बन गया है और लगातार सेवा कार्यों में जुटा है।
ग्रुप के सक्रिय सदस्य मो. अतीक बताते हैं कि कोरोना काल में लोगों की मुश्किलें और असहायता देखकर उन्होंने साथियों के साथ मिलकर इस पहल की शुरुआत की थी। उस समय दवा पहुंचाने तक से लोग डरते थे, जबकि कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। इसी अनुभव ने उन्हें समाज सेवा के लिए प्रेरित किया।
आज यह समूह शादी-विवाह, इलाज, रक्तदान, सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की सहायता, शिक्षा और राशन जैसी जरूरतों में मदद करता है। खिदमत ग्रुप अब तक 1000 से अधिक लोगों की सहायता कर चुका है। पिछले दो वर्षों में टीम ने 10 गरीब लड़कियों की शादी में आर्थिक सहयोग दिया है और 100 से अधिक गंभीर मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने में मदद की है।
ग्रुप की खास बात यह है कि इसका पूरा खर्च सदस्य स्वयं उठाते हैं। सभी सदस्य हर महीने 500 रुपये तक का योगदान करते हैं। टीम में छात्र, व्यवसायी, निजी और सरकारी क्षेत्र में कार्यरत युवा शामिल हैं। सदस्यों ने खैनी, गुटखा, बीड़ी और सिगरेट जैसी नशीली चीजों से दूरी बनाकर उसी पैसे को सेवा कार्यों में लगाने का संकल्प लिया है। इससे कई युवाओं की नशे की आदत भी छूट गई है।
मोहम्मद बाबर के अनुसार, सहायता देने से पहले टीम घटना का सत्यापन करती है। जरूरत के अनुसार आर्थिक मदद, सामान या अन्य सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। वहीं सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए अलग से सक्रिय सदस्य तैनात किए गए हैं।
जात-पात और धर्म से ऊपर उठकर काम करने वाला खिदमत ग्रुप आज पूरे क्षेत्र में मानवता, सेवा और सामाजिक एकता की मिसाल बन गया है। स्थानीय लोग इन युवाओं के प्रयासों को समाज के लिए प्रेरणादायक मानते हैं।