भागलपुर में आंधी-तूफान का कहर, हजारों पक्षियों की मौत से पर्यावरण पर मंडराया संकट
भागलपुर में आए भीषण आंधी-तूफान और तेज बारिश ने जहां जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया, वहीं इस प्राकृतिक आपदा ने हजारों बेगुनाह पक्षियों की जान भी ले ली। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में पक्षी मृत पाए गए, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
जानकारी के अनुसार भागलपुर के झौवाकोठी और खिरनीघाट इलाके में ही एक हजार से अधिक पक्षियों की मौत का अनुमान लगाया गया है। मृत पक्षियों में एशियन कोयल, गंगा मैना, बैंक मैना समेत मैना की कई प्रजातियां शामिल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज आंधी के दौरान पेड़ उखड़ गए, डालियां टूट गईं और कई पक्षी तेज हवाओं की चपेट में आकर जमीन पर गिर पड़े, जिससे उनकी मौत हो गई।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह आंकड़ा पूरे जिले का नहीं, बल्कि केवल दो इलाकों का है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे भागलपुर जिले में इस आंधी-तूफान के कारण कितनी बड़ी संख्या में पक्षियों की जान गई होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पक्षियों की मौत केवल वन्यजीवों का नुकसान नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पर्यावरण संतुलन और मानव जीवन पर भी पड़ता है। पक्षी प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये कीट नियंत्रण, बीज फैलाव और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में मददगार होते हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से मृत पक्षियों के सही आंकलन और संरक्षण को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं का असर अब इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
भागलपुर में आई इस भयावह आंधी ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि प्रकृति का असंतुलन अब कितनी तेजी से पर्यावरण और जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर संकट बनता जा रहा है।